अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने ट्रस्ट पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद से ही अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज है।
आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ है और दोनों पक्षों का इस पर क्या कहना है…
समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर इस मामले को वैश्विक स्तर पर सनातनी समाज की आस्था से खिलवाड़ बताया।
उधर, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस विवाद में कूदते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “चंदा चोरों गद्दी छोड़ो। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर चंदा चोरी करने वालों को जेल भेजो।” उन्होंने चंपत राय को प्रभु श्रीराम की मूर्ति पर हाथ रखकर सौगंध खाने की चुनौती भी दे डाली।
इस पूरे मामले में उस समय नाटकीय मोड़ आ गया जब सूत्रों के हवाले से यह खबर आई कि दानपात्र की गिनती के समय हेराफेरी के आरोप में राम मंदिर परिसर में देर रात तक जांच चली।
चतरफा हमलों के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों और भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है:
आपको बता दें कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर परिसर और पूरे दर्शन मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगभग 4 दर्जन (48) दानपात्र रखवाए हैं। इन पेटिकाओं में आने वाली नकदी को हर दिन इकट्ठा किया जाता है। इस धनराशि की सुरक्षित और पारदर्शी गिनती के लिए ट्रस्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को अधिकृत कर रखा है। इसी गिनती और ऑडिट के दौरान कथित गड़बड़ी की बातें सामने आई थीं।
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