शेयर बाजार में रैली
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब ग्लोबल मार्केट के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को कारोबार शुरू होते ही घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 700 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने की पुष्टि के बाद वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ गया है। ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई के बाद निवेशकों में इस बात की चिंता बढ़ गई है कि संघर्ष कहीं लंबा न खिंच जाए।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई।
बाजार खुलने से पहले ही कमजोर शुरुआत के संकेत मिलने लगे थे। प्री-ओपनिंग कारोबार में सेंसेक्स करीब 540 अंक गिरकर 76,397.24 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी 203 अंक टूटकर 23,852.05 पर आ गया।
इससे पहले मंगलवार को निफ्टी 24,055.8 के स्तर पर बंद हुआ था। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में लगभग सभी शेयर लाल निशान में नजर आए। सिर्फ सनफार्मा का शेयर शुरुआती दौर में बढ़त बनाए हुए था।
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल के बाजार में दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 फीसदी उछलकर 96.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह करीब छह हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है।
निवेशकों को आशंका है कि अगर मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ता है और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल, रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका रहती है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक निवेशकों के बीच ‘सेफ हेवन’ एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। वहीं उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव भी बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई की आशंका के बीच वैश्विक बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी बना रह सकता है।
अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान संघर्ष की अगली कार्रवाई, कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर रहेगी।
अगर सैन्य तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं तनाव कम होने और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने पर बाजार में राहत की उम्मीद की जा सकती है।
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