नई दिल्ली: दशहरा पर रावण दहन देखने और मेले का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ घरों से निकलते हैं। बच्चों के लिए झूले, खिलौने और खाने-पीने के स्टॉल किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होते, लेकिन भारी भीड़ में जरा-सी लापरवाही परेशानी का कारण बन सकती है। कई बार चलते-चलते माता-पिता और बच्चों का हाथ छूट जाता है और बच्चा घबराकर इधर-उधर भटकने लगता है। ऐसे में मेले में जाने से पहले कुछ जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाना बेहद अहम है। इन छोटी-छोटी तैयारियों से बच्चे को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उसे जल्द ढूंढने में मदद मिल सकती है।
मेले में जाने से पहले बच्चे के पास माता-पिता का नाम और कम से कम दो फोन नंबर लिखकर रखें। इसके लिए दो पर्चियां तैयार कर सकते हैं। एक पर्ची बच्चे की जेब में रखें और दूसरी को उसके कपड़े या जूते में सुरक्षित जगह पर रख दें। ध्यान रहे कि पर्ची आसानी से निकलकर गिरे नहीं।
अगर बच्चा भीड़ में आपसे अलग हो जाता है और घबराहट में अपना पता या फोन नंबर नहीं बता पाता, तो यह जानकारी किसी मदद करने वाले व्यक्ति को परिवार तक पहुंचने में सहायता कर सकती है।
मेले के लिए निकलते समय बच्चे की एक साफ तस्वीर अपने फोन में जरूर खींच लें। तस्वीर में उसके कपड़े और जूते भी दिखाई दें तो बेहतर है। अगर बच्चा भीड़ में खो जाता है, तो उसकी हालिया तस्वीर पुलिस, सुरक्षा कर्मियों या खोया-पाया केंद्र पर दिखाकर पहचान बताना आसान हो सकता है।
भीड़ में केवल बच्चे के कपड़ों का रंग बताने के बजाय तस्वीर दिखाना ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
मेले में प्रवेश करने के बाद किसी स्पष्ट और आसानी से पहचानी जाने वाली जगह को मिलने का स्थान तय करें। बच्चे को पहले ही बता दें कि अगर वह आपसे अलग हो जाए, तो कहां रुकना है।
हालांकि, भीड़ में किसी दुकान या स्टॉल को ही एकमात्र सुरक्षित जगह मानना ठीक नहीं है। बच्चे को समझाएं कि वह इधर-उधर तलाशने या अकेले बाहर जाने के बजाय किसी पुलिसकर्मी, सुरक्षा गार्ड या खोया-पाया केंद्र के कर्मचारी से मदद मांगे।
मेले में प्रवेश करते समय बच्चे को खोया-पाया केंद्र और सुरक्षा कर्मियों की जगह दिखा दें। उसे पुलिसकर्मी या अधिकृत सुरक्षा कर्मचारी की पहचान भी समझाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर वह सही व्यक्ति से सहायता ले सके।
बच्चे को यह भी बताएं कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ कहीं नहीं जाना है। अगर वह आपसे बिछड़ जाए, तो वहीं मौजूद किसी अधिकृत कर्मचारी से मदद मांगे और अपने माता-पिता का नाम व फोन नंबर बताए।
अगर बच्चा इतना बड़ा है कि बातें याद रख सकता है, तो उसे माता-पिता में से किसी एक का मोबाइल नंबर और अपना नाम जरूर याद कराएं। उम्र के अनुसार घर का पता या किसी भरोसेमंद परिजन की जानकारी भी सिखाई जा सकती है।
बच्चे को सरल शब्दों में यह समझाना भी जरूरी है कि माता-पिता से अलग होने पर घबराना नहीं है, किसी सुरक्षित कर्मचारी से मदद लेनी है और बिना बताए किसी के साथ नहीं जाना है।
रावण दहन के समय मेले में भीड़ अचानक बढ़ सकती है। कार्यक्रम खत्म होने पर बड़ी संख्या में लोग एक साथ बाहर निकलते हैं, जिससे धक्का-मुक्की और बच्चों के हाथ छूटने का खतरा बढ़ जाता है।
कोशिश करें कि बच्चे का हाथ मजबूती से पकड़े रहें और भीड़ के दबाव वाले स्थानों से दूर खड़े हों। आयोजकों और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें। कार्यक्रम खत्म होते ही भीड़ के साथ धक्का देते हुए निकलने के बजाय, यदि जगह सुरक्षित हो, तो कुछ देर रुककर भीड़ कम होने दें। आपात स्थिति में निर्धारित निकास मार्ग का इस्तेमाल करें और भगदड़ जैसी स्थिति दिखने पर भीड़ की दिशा में उलटकर आगे बढ़ने की कोशिश न करें।
दशहरा मेले की खुशियां बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि मनोरंजन के साथ बच्चों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए। निकलने से पहले संपर्क जानकारी तैयार रखना, बच्चे को मदद मांगना सिखाना और भीड़ में उस पर लगातार नजर बनाए रखना किसी भी अनहोनी की आशंका को कम करने में मदद कर सकता है।
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