वैश्विक और घरेलू संकेतों के बीच कमोडिटी बाजार में एक बार फिर से बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जिससे पूरी मार्केट की चाल बदल दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जहां पिछले 5 दिनों से बढ़त देखने को मिल रही थी, वहीं आज इस तेज़ी पर ब्रेक लग गया है। आज यानी 13 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड, दोनों की कीमतों में 1% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। सूत्रों के मुताबिक कच्चे तेल के दामों में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच नए समझौते की उम्मीदों को माना जा रहा है।
देश पर क्या पढ़ेगा असर!
कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से भारत को कई स्तरों पर राहत मिलती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों ने हाल के दिनों में क्रूड महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए है। ऐसे में अब जब क्रूड ऑयल में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत गिरावट करना अभी मुशकिल बताया जा रहा है।
क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?
क्रूड ऑयल की कीमतों में दर्ज की गई गिरावट का मुख्य कारण कमजोर वैश्विक मांग, अमेरिका में तेल के बढ़ते स्टॉक और OPEC द्वारा मांग के अनुमान में कटौती को माना जा रहा है। OPEC ने इस साल के लिए वैश्विक तेल मांग में बढ़ोतरी को घटा दिया है।
क्या मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो रहा है?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित डील की उम्मीदों को भी बताया जा रहा है। निवेशकों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत से तेल सप्लाई के सबसे अहम रास्ते Strait of Hormuz के सुरक्षित रहने की उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि, इस गिरावट का भारत में फिलहाल कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच मिडिल ईस्ट में समझौता हो जाता है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई सामान्य हो जाती है, और लंबे समय में इसका फायदा भारतीय ग्राहकों को भी मिल सकता है।