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दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश, फिर भी 95% हिस्सा वीरान! आखिर ऑस्ट्रेलिया के इस विशाल इलाके में क्यों नहीं बसते लोग?

नई दिल्ली: दुनिया में कई देश ऐसे हैं जो अपने विशाल क्षेत्रफल और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का मामला बेहद दिलचस्प है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश है और एक देश होने के साथ-साथ पूरा महाद्वीप भी है। इसके बावजूद इसके करीब 95 फीसदी हिस्से में या तो आबादी नहीं है या बेहद कम लोग रहते हैं। हर साल लाखों लोग यहां घूमने और पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं, लेकिन स्थायी रूप से बसने के लिए ज्यादातर लोग समुद्र के किनारे बसे शहरों को ही प्राथमिकता देते हैं। इसके पीछे जलवायु, पानी, मिट्टी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई बड़ी वजहें हैं।

तटीय शहरों में ही क्यों बसती है ज्यादातर आबादी?

जियो साइंस ऑस्ट्रेलिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया का कुल क्षेत्रफल करीब 76.9 लाख वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह भारत से लगभग ढाई गुना बड़ा है, लेकिन आबादी करीब 2.78 करोड़ है। इतनी बड़ी जमीन और अपेक्षाकृत कम आबादी की वजह से यहां जनसंख्या घनत्व भी काफी कम है। ऑस्ट्रेलिया में औसतन एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में करीब 4 लोग रहते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा करीब 430 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

ऑस्ट्रेलिया की 85 फीसदी से ज्यादा आबादी सिडनी, मेलबर्न, ब्रिस्बेन, पर्थ और एडिलेड जैसे समुद्र तटीय शहरों में रहती है। इसके उलट देश का विशाल अंदरूनी इलाका बेहद कम आबादी वाला है। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया का मध्य और अंदरूनी हिस्सा दुनिया के सबसे कम आबादी वाले इलाकों में गिना जाता है।

शुष्क जलवायु ने अंदरूनी इलाकों को बनाया मुश्किल

ऑस्ट्रेलिया के अंदरूनी हिस्सों में बड़ी आबादी के बसने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक वहां की जलवायु है। अंटार्कटिका के बाद ऑस्ट्रेलिया को दुनिया का दूसरा सबसे शुष्क महाद्वीप माना जाता है। देश का करीब 70 फीसदी हिस्सा अर्द्ध-शुष्क या रेगिस्तानी श्रेणी में आता है।

ग्रेट विक्टोरिया, सिम्पसन, ग्रेट सैंडी और तनामी जैसे विशाल रेगिस्तानी इलाके देश के अंदर तक फैले हुए हैं। इन क्षेत्रों में तापमान काफी ऊंचा रहता है और बारिश भी बेहद कम होती है। कई इलाकों में पानी की उपलब्धता इतनी सीमित है कि सामान्य जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

मीठे पानी की कमी भी बड़ी वजह

ऑस्ट्रेलिया के अंदरूनी हिस्सों में मीठे पानी की उपलब्धता सीमित है। कई इलाकों में साल भर बहने वाली नदियों का अभाव है। मरे-डार्लिंग जैसी प्रमुख नदी प्रणालियां भी मुख्य रूप से देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक सीमित हैं।

पानी की कमी का सीधा असर खेती, उद्योग और रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। यही वजह है कि अंदरूनी इलाकों में बड़े पैमाने पर आबादी बसाना आसान नहीं है। जहां पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं, लोग उन्हीं क्षेत्रों में रहना अधिक पसंद करते हैं।

मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी से खेती भी मुश्किल

ऑस्ट्रेलिया के बड़े हिस्से की मिट्टी में फास्फोरस और नाइट्रोजन जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी बताई जाती है। इसका असर कृषि पर पड़ता है और विशाल भूभाग होने के बावजूद हर जगह खेती करना आसान नहीं है।

जब जमीन, पानी और जलवायु तीनों ही बड़ी आबादी के अनुकूल न हों, तो वहां बड़े शहरों और स्थायी बस्तियों का विकास भी मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि देश का बड़ा हिस्सा आबादी के बजाय प्राकृतिक और खनिज संसाधनों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण बना हुआ है।

सड़क से लेकर इंटरनेट तक, हर सुविधा पहुंचाना महंगा

ऑस्ट्रेलिया के अंदरूनी इलाकों में आबादी कम होने की वजह से बुनियादी ढांचे का विस्तार भी आसान नहीं है। दूर-दराज के क्षेत्रों तक सड़क, रेलवे, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाएं पहुंचाने में काफी खर्च आता है। इसके अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता भी तटीय शहरों की तुलना में सीमित है।

लोगों के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की सुविधाएं तटीय शहरों में आसानी से उपलब्ध होती हैं। इसलिए विशाल लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले अंदरूनी इलाकों की बजाय आबादी का बड़ा हिस्सा तटीय क्षेत्रों में केंद्रित है।

वीरान दिखने वाला इलाका खनिजों से है बेहद समृद्ध

ऑस्ट्रेलिया का कम आबादी वाला अंदरूनी हिस्सा बेकार या संसाधनहीन नहीं है। इसके उलट यहां लोहा, सोना, यूरेनियम और लिथियम समेत कई महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। इनका बड़े पैमाने पर खनन किया जाता है।

खनन गतिविधियों के लिए अंदरूनी क्षेत्रों में अस्थायी बस्तियां और कामगारों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की गई हैं। यानी ऑस्ट्रेलिया का विशाल अंदरूनी हिस्सा भले ही आम आबादी से लगभग खाली नजर आता हो, लेकिन आर्थिक और प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से उसका महत्व बेहद बड़ा है।

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