Latest News

न मां का DNA बदला, न पिता का मिला-जुला जेनेटिक कोड… फिर भी पैदा हुए हूबहू क्लोन! ब्राजील के इस पौधे ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

नई दिल्ली: कुदरत के नियमों के मुताबिक सेक्सुअल रिप्रोडक्शन में माता और पिता दोनों का डीएनए आपस में मिलता है। इसी जेनेटिक फेरबदल की वजह से संतान अपने माता-पिता से अलग और जेनेटिक तौर पर यूनिक होती है। लेकिन ब्राजील में पाया जाने वाला एक छोटा सा पौधा इस स्थापित समझ को चुनौती दे रहा है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट ब्रीडिंग रिसर्च के वैज्ञानिकों की अगुवाई में हुई नई स्टडी में रिंकोस्पोरा टेन्युइस नाम के पौधे को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है।

यह पौधा पोलन बनाता है, अंडों को फर्टिलाइज करता है और बीज भी तैयार करता है। यानी यह सेक्सुअल रिप्रोडक्शन की पूरी प्रक्रिया अपनाता है। इसके बावजूद अगली पीढ़ी में माता-पिता के डीएनए का सामान्य तरीके से मिश्रण नहीं होता। नतीजा यह होता है कि इससे पैदा होने वाला पौधा अपनी मां की हूबहू जेनेटिक कॉपी यानी प्राकृतिक क्लोन बन जाता है।

आखिर इस पौधे में ऐसा क्या है, जो सेक्सुअल रिप्रोडक्शन का सामान्य नियम ही बदल देता है?

सेक्सुअल रिप्रोडक्शन करने वाले ज्यादातर जीवों में मियोसिस नाम की खास सेल डिवीजन प्रक्रिया होती है। इसी दौरान क्रोमोसोम एक-दूसरे के साथ डीएनए के हिस्सों की अदला-बदली करते हैं। इसे जेनेटिक क्रॉसओवर कहा जाता है। यही प्रक्रिया संतानों में जेनेटिक विविधता पैदा करने में अहम भूमिका निभाती है।

लेकिन रिंकोस्पोरा टेन्युइस में यही सामान्य प्रक्रिया अलग तरीके से होती है। यह पौधा बिना क्रॉसओवर के अपनी रिप्रोडक्शन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सक्षम है।

इस पौधे के क्रोमोसोम भी हैं बेहद अलग

रिंकोस्पोरा टेन्युइस में फूल वाले पौधों के बीच सबसे कम क्रोमोसोम नंबर पाए जाते हैं। इसके क्रोमोसोम का स्ट्रक्चर भी बाकी पौधों से काफी अलग है। इसमें सेंट्रोमियर की एक्टिविटी पूरे क्रोमोसोम पर फैली रहती है। इस तरह के क्रोमोसोम को होलोसेंट्रिक क्रोमोसोम कहा जाता है।

यही अनोखा जीनोम आर्किटेक्चर इस पौधे को बिना क्रॉसओवर के अपनी रिप्रोडक्शन प्रक्रिया जारी रखने में मदद करता है।

10 हजार से ज्यादा पोलन की जांच में मिला चौंकाने वाला सबूत

इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों की इंटरनेशनल टीम ने ब्राजील से रिंकोस्पोरा टेन्युइस के नौ पौधे कलेक्ट किए और उनकी विस्तृत जीनोम असेंबली तैयार की। इसके लिए क्रोमोसोम इमेजिंग, सिंगल पोलन न्यूक्लिआई सीक्वेंसिंग और कंट्रोल्ड क्रॉसिंग एक्सपेरिमेंट्स का इस्तेमाल किया गया।

रिसर्चर्स ने 10 हजार से ज्यादा पोलन न्यूक्लिआई की बारीकी से जांच की। इसके बावजूद किसी भी क्रोमोसोम के बीच क्रॉसओवर का कोई सबूत नहीं मिला। फीमेल रिप्रोडक्शन पाथवे में भी क्रोमोसोम एक्सचेंज पूरी तरह गायब पाया गया।

साइटोलॉजिकल, जीनोमिक और सिंगल-सेल एनालिसिस से यह सामने आया कि मेल और फीमेल दोनों तरफ से डीएनए का लेन-देन शून्य था। किसी सेक्सुअल रिप्रोडक्शन करने वाली स्पीशीज में दोनों तरफ क्रॉसओवर का इस तरह न होना साइंस के इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड किया गया।

87 फीसदी बीज खुद ही नष्ट हो जाते हैं, फिर कैसे बनता है क्लोन?

स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस पौधे में इनहेरिटेंस का तरीका बेहद पक्षपाती है। जंपिंग जींस कहे जाने वाले ट्रांसपोजेबल एलिमेंट्स की वजह से इसके कुछ क्रोमोसोम आकार में काफी बड़े हो गए हैं। इन्हीं बड़े क्रोमोसोम को पोलन और अंडों के जरिए अगली पीढ़ी में ट्रांसफर होने के लिए चुना जाता है।

क्रोमोसोम के सिरों में मौजूद स्ट्रक्चरल अंतर यह तय करते हैं कि कौन सा कॉम्बिनेशन आगे बढ़ेगा। फर्टिलाइजेशन के बाद नेचर का बेहद कड़ा सिलेक्शन शुरू होता है। करीब 87 फीसदी बीज परिपक्व होने से पहले ही खुद को अबॉर्ट कर लेते हैं।

सिर्फ वही बीज बच पाते हैं, जो मां के पुराने हेटेरोजाइगस क्रोमोसोम कॉम्बिनेशन को हूबहू दोबारा तैयार करते हैं। इसी कड़े चयन के कारण बचने वाला हर नया पौधा मां की जेनेटिक कॉपी बनकर सामने आता है।

क्या खेती और फसल ब्रीडिंग का तरीका बदल सकता है यह पौधा?

इस रिसर्च के लीडर आंद्रे मार्केस के मुताबिक, इस खोज का महत्व सिर्फ इवोल्यूशन को समझने तक सीमित नहीं है। एग्रीकल्चर साइंस और प्लांट ब्रीडिंग में जेनेटिक रीकॉम्बिनेशन को नियंत्रित करना वैज्ञानिकों का दशकों पुराना लक्ष्य रहा है।

किसानों के लिए बड़ी चुनौती यह होती है कि किसी बेहतरीन हाइब्रिड फसल के गुण अगली पीढ़ी में बीजों के जरिए बिना बदले आगे तक पहुंचें। सामान्य सेक्सुअल रिप्रोडक्शन में डीएनए के मिश्रण की वजह से हाइब्रिड फसलों के अच्छे गुण अगली पीढ़ी में बिखर सकते हैं।

रिंकोस्पोरा टेन्युइस में कुदरती तौर पर बिना गुण खोए सेक्सुअल बीजों के जरिए क्लोन तैयार होने की क्षमता वैज्ञानिकों के लिए खास दिलचस्पी का विषय है। अगर इस प्राकृतिक मैकेनिज्म को सामान्य फसलों में लागू करने में कामयाबी मिलती है, तो भविष्य में सुपर हाइब्रिड फसलों के बीज तैयार करना अधिक सस्ता और आसान हो सकता है।

vineet verma

Recent Posts

बिग बॉस 20 के घर में हुआ बड़ा खुलासा! गुल्लू की टूटी शादी का सच आया सामने, लीक तस्वीरों का भी खुला राज

टेलीविज़न के सबसे विवादित और लोकप्रिय रियलिटी शो 'बिग बॉस सीजन 20' के घर में…

2 hours ago

SIR के बीच चुनाव आयोग के भीतर घमासान? द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल!

एसआईआर को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक…

2 hours ago

अंधविश्वास की आग में स्वाहा हुआ परिवार: आजमगढ़ के अहरौला में हुए नरसंहार की एक-एक खौफनाक रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान!

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में 22…

3 hours ago

बॉल बॉय से एशियन गेम्स के इतिहास पुरुष तक! जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में ब्रॉन्ज जीतकर रचा नया इतिहास

कभी मैदान के किनारे खड़े होकर बॉल बॉय की जिम्मेदारी निभाने वाला एक आम लड़का,…

4 hours ago

अमेरिका के फ्लोरिडा में सजने जा रहा है दुनिया के दिग्गजों का मंच! क्या पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की होगी महा-बैठक?

क्या साल के आखिरी महीने में दुनिया के दो सबसे प्रभावशाली नेता एक बार फिर…

5 hours ago