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कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ‘नो-फॉल्ट’ मुआवजा नीति बनाने का दिया आदेश! कहा—’लोगों ने देश के लिए टीका लगवाया तो…’

सुप्रीम कोर्ट ने एक गेम-चेंजिंग फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार और निर्देश दोनों दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि COVID-19 वैक्सीनेशन के बाद अगर किसी को सीरियस साइड इफेक्ट्स हुए हैं, तो उन्हें मुआवजा देने के लिए अगले 3 महीने में एक ‘No-Fault Compensation Policy’ तैयार की जाए।

आखिर क्या है ये ‘No-Fault’ मुआवजा?
इस नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा पाने के लिए यह साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि सरकार या वैक्सीन बनाने वाली कंपनी (जैसे सीरम इंस्टीट्यूट या भारत बायोटेक) की कोई गलती या लापरवाही थी।
अगर वैज्ञानिक रूप से यह कन्फर्म हो जाता है कि हेल्थ इश्यू वैक्सीन की वजह से ही हुआ है, तो बिना किसी ‘ब्लेम गेम’ के पीड़ित सीधे मुआवजे का हकदार होगा।

कोर्ट के आदेश की 5 बड़ी बातें:
1- जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पॉलिसी ड्राफ्ट करने के लिए सिर्फ 90 दिन का टाइम दिया है।

2- वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से जुड़ा हर डेटा अब Public Domain में होगा। आम जनता और वैज्ञानिकों को पता होना चाहिए कि जमीन पर क्या चल रहा है।

3- कोर्ट ने एक वर्चुअल प्लेटफॉर्म बनाने का सुझाव दिया है, ताकि डॉक्टर और आम लोग आसानी से साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट ऑनलाइन कर सकें।

4- कोर्ट ने कहा कि जब लोगों ने ‘देश के हित’ में वैक्सीन लगवाई, तो उन दुर्लभ (Rare) मामलों में होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती।

5- नई एक्सपर्ट बॉडी नहीं बनेगी, बल्कि पुराने AEFI निगरानी सिस्टम को ही अब ज्यादा पारदर्शी और एक्टिव बनाया जाएगा।

मामला कोर्ट तक कैसे पहुँचा?

यह जीत उन माता-पिता की है जिन्होंने अपनी बेटियों को वैक्सीन के कथित साइड इफेक्ट्स की वजह से खो दिया। याचिकाकर्ता रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन की दलील थी कि सरकार ने जोखिमों की पूरी जानकारी नहीं दी और जब हादसा हुआ, तो मदद के लिए कोई सिस्टम ही नहीं था।

अब आगे क्या?
लीगल एक्सपर्ट्स और फाइनेंशियल एनालिस्ट्स का मानना है कि: सरकार को अब मुआवजे के लिए एक अलग ‘फंड’ बनाना पड़ेगा। चूंकि यह ‘नो-फॉल्ट’ पॉलिसी है, इसलिए कानूनी लड़ाइयां कंपनियों के बजाय सरकारी फ्रेमवर्क के जरिए सुलझेंगी। एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है की यह फैसला भविष्य की महामारियों और वैक्सीनेशन ड्राइव के लिए एक गोल्ड स्टैंडर्ड सेट करेगा।

news desk

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