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यूपी कैबिनेट की बैठक में 30 बड़े फैसले: ओला-उबर पर सख्ती, संपत्ति रजिस्ट्री के नए नियम; जानिए क्या-क्या बदला

उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। बैठक में कुल 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनका असर परिवहन, आवास, संपत्ति पंजीकरण और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े नियमों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।

सबसे अहम फैसला ओला और उबर जैसी एग्रीगेटर टैक्सी कंपनियों को लेकर लिया गया है। अब इन कंपनियों को उत्तर प्रदेश में सेवाएं देने के लिए राज्य में अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यह रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए मान्य रहेगा। इसके लिए कंपनियों को करीब पांच लाख रुपये का शुल्क भी देना होगा।सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन, वाहन फिटनेस, ड्राइवर के मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी एग्रीगेटर टैक्सी नहीं चल सकेगी। यानी अब टैक्सी सेवाओं को लेकर नियम पहले से ज्यादा सख्त किए गए हैं। हालांकि यह नियम तिपहिया ऑटो और दोपहिया वाहनों पर लागू नहीं होगा।

कैबिनेट बैठक में स्टाम्प और पंजीयन विभाग से जुड़ा भी एक अहम फैसला लिया गया। अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसकी मालिकाना हक की जांच की जाएगी। प्रॉपर्टी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान खतौनी के आधार पर देखी जाएगी। अगर मालिकाना हक की पुष्टि नहीं होती है तो उस संपत्ति का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।इसके अलावा संपत्तियों पर स्टाम्प शुल्क सर्किल रेट के आधार पर ही लगाया जाएगा। वहीं नगर निगम सीमा के भीतर आने वाली संपत्तियों पर दो प्रतिशत विकास शुल्क भी अलग से लिया जाएगा।

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला भी लिया है। इसके तहत आवास योजना में मिलने वाली आर्थिक सीमा को 6.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही कांशीराम आवास योजना के तहत बने घरों में अगर कहीं अवैध कब्जा है तो उसे हटाया जाएगा। इन घरों की मरम्मत और रंगाई-पुताई के बाद उन्हें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के पात्र परिवारों को आवंटित किया जाएगा।

सरकारी कर्मचारियों को लेकर भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अब सभी कर्मचारी और अधिकारी अपनी चल और अचल संपत्ति की जानकारी हर साल सरकार को देंगे। अगर कोई कर्मचारी अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक निवेश करता है तो उसकी जांच की जाएगी।

इसके अलावा राज्य के कई जिलों के विकास के लिए भी मंजूरी दी गई है। बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ में नए शहरों के विकास और शहरी विस्तार के लिए बड़े ऐलान किये गए  है। वहीं अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए भी जमीन नगर निगम को निशुल्क देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य में विकास कार्यों को गति मिलेगी और प्रशासनिक व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी बनेगी।

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