Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: राजमहल की वह जादुई वीणा जिसे कोई नहीं साध सका — फिर आया एक अज्ञात कलावंत, जिसने बदल दी कथा!
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > फीचर > राजमहल की वह जादुई वीणा जिसे कोई नहीं साध सका — फिर आया एक अज्ञात कलावंत, जिसने बदल दी कथा!
फीचर

राजमहल की वह जादुई वीणा जिसे कोई नहीं साध सका — फिर आया एक अज्ञात कलावंत, जिसने बदल दी कथा!

news desk
Last updated: October 25, 2025 5:06 pm
news desk
Share
एआई जेनेरेटड फोटो
एआई जेनेरेटड फोटो
SHARE

प्रकृति हमेशा से मनुष्य के लिए रहस्य और जिज्ञासा का विषय रही है. मानव ने हर युग में प्रकृति को अपनी देवी, अपनी प्रेरणा और अपनी सम्पूर्ण सृष्टि का आधार माना है. इसीलिए प्रकृति , उसके रहस्यों की जादुई कहानियां भारत की लोक-कथाओं के साथ-साथ मिस्र, जापान और चीन जैसे प्राचीन सभ्यता वाले देशों की लोक-कथाओं में काफी मिलती हैं.

चीन में एक ऐसी ही प्रसिद्ध लोककथा है, जो ‘जादुई वाद्य यंत्र’ (The magical instrument) या ‘गुआझिंग पेड़ की कथा’ के नाम से प्रचलित है.

इस चीनी लोक-कथा के अनुसार बहुत समय पहले चीन के एक दूरदराज गाँव में एक विशाल वृक्ष था, जिसकी शाखाएं दूर-दूर तक फैंली थीं. यह अद्भुत पेड़ लोगों के लिए पवित्र और काफी रहस्यमयी भी था. कहा जाता था कि वह वृक्ष आसमान से उतरी किसी दैवीय शक्ति का प्रतीक था. इसलिए गांव के लोग इसे पूजनीय मानते थे.

जब राजा ने पवित्र वृक्ष से बनवायी अद्भुत शक्तियों वाली दैवीय वीणा

एक रात, उस राज्य के राजा को सपना आता है. उसके सामने गांव के देवता प्रकट होते हैं और बताते हैं कि दैवीय वृक्ष धरती पर अपना जीवन पूरा कर चुका है. आने वाली अमावस्या की रात वह धरती को छोड़कर देवलोक की ओर प्रस्थान करेगा. देवता की बात सुनकर राजा चिंतित हो उठता है, क्योंकि उस पवित्र पेड़ से गांव के लोगों की श्रद्धा जुड़ी हुई थी.

राजा ने निर्णय लिया कि वह इस वृक्ष की याद को अमर बनाएगा. उसने आदेश दिया कि वृक्ष की शाखाओं से एक वीणा बनाई जाए. दूर-दूर से कुशल कारीगर बुलाए गए और महीनों की मेहनत के बाद, वृक्ष की शाखाओं से एक अद्भुत वीणा तैयार हुई. राजा ने उसे महल के आलीशान संगीत कक्ष में स्थापित किया.

पर आश्चर्य की बात यह थी उस वीणा को कोई वादक साध ही न पाया. किसी भी संगीतज्ञ में इसे साधने का सामर्थ्य ही नहीं था. वर्षों बीत गए. इस दौरान राजा ने दूर-दूर से महान कलाकारों, संगीतज्ञों  को बुलाया, पर कोई भी उसे साध नहीं सका. लगता था, यह वीणा केवल उस व्यक्ति के लिए बनी थी जो धरती पर अद्वितीय हो.

राजा के दरबार में पहुंचा लू यिन

एक बार राजा को सूचना मिली कि गांव से दूर पहाड़ों पर लू यिन नामक एक संगीतज्ञ रहता है. उसके पास प्रकृति की ध्वनि और संगीत को समझने की अनूठी क्षमता थी. राजा ने लू यिन को महल में बुलाया.

जब लू यिन दरबार में प्रवेश करता है, उसकी लंबी जटाओं और असाधारण व्यक्तित्व को देखकर सभी चकित रह जाते हैं. राजा विनम्रता से हाथ जोड़कर उसका स्वागत करता है और उसे पवित्र वीणा की कथा कह सुनाता है.

राजा लू यिन को बताता है कि इस वीणा का संगीत सुनने के लिए मैं वर्षों से प्रतीक्षा करता रहा हूं, परन्तु महान से महान कलावंत भी इसे साध न सका, उन सबका अहंकार टूट गया. अब मेरी अंतिम आशा आपसे से ही है.

इसी के साथ वह जादुई वीणा दरबार में लाई जाती है. लू यिन कालीन बिछाकर उसपर बैठ जाता है. सबसे पहले वह उस दैवीय वीणा को श्रद्धाभाव से प्रणाम करता है. वह उस वीणा के सामने नतमस्तक हो जाता है.

दरबार में उपस्थित लोगों को हैरानी होती है कि क्या लू यिन सो गया है या वीणा के चमत्कारी प्रभाव से बेहोश हो गया है? क्या यह वीणा सच में असाध्य है ? क्या धरती पर बड़े से बड़ा कलावंत भी इसे साध नहीं पायेगा ?

पर नहीं ! न तो वह सोया था, न बेहोश हुआ था. वह अपने मन और आत्मा को उस दैवीय वीणा को समर्पित कर रहा था. लू यिन ने वीणा को जब छुआ, तो उसकी आँखों में गहरी श्रद्धा झलक उठी. उसने मानो स्वयं प्रकृति से संवाद किया—
‘ हे पवित्र वीणा, जिसमें सृष्टि की आत्मा बसती है, तुम्हें प्रणाम! तुमने सदियों तक मनुष्य, पशु-पक्षी, और हर जीव को अपनी छाया में पाला है. तुम्हारी शाखाओं पर गिलहरियाँ खेलीं, तितलियाँ नाचीं, पक्षियों ने गीत गाए. तुमने नदियों को जल दिया, धरती को हरियाली, और आकाश को ऊंचाई.’ फिर वह मुस्कुराया और बोला—
‘अब तुम गाओ, जैसे वसंत की हवा फूलों को झुलाती है, जैसे बारिश की बूँदें सूखी धरती को जगा देती हैं, जैसे बर्फीली हवाएँ पर्वतों को छूकर नृत्य करती हैं—वैसे ही, हे प्रकृति की वीणा, तुम भी गा उठो…’

जैसे ही लू यिन ने अपने अंगुलियों के पोरों से उस दैवीय वीणा के तारों को हल्के से स्पर्श किया, वह अलौकिक वीणा झनाझन कर बज उठती है.दैवीय वीणा की वह मधुर झंकार इतनी सम्मोहक थी कि हर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गया. वह ध्वनि इतनी मधुर, इतनी जीवंत थी कि दरबार में उपस्थित हर व्यक्ति समय के प्रवाह से जैसे थम गया. किसी को लगा मानो भीतर का सारा अभिमान और लालसा उस संगीत में पिघल गई हो, तो किसी को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसकी आत्मा निर्मल हो उठी हो.

राजा और रानी की आँखों से अहंकार बह निकला, दरबारीगणों का वैभव मौन हो गया और आम लोगों के हृदय में छिपे स्वार्थ की परतें गलने लगीं. वह संगीत सबके भीतर अलग-अलग रूप में गूंज रहा था—कहीं शांति बनकर, कहीं करुणा, तो कहीं आनंद की मृदु लहर बनकर.

प्रकृति भी इस लय में शामिल हो गई —गिलहरियाँ डालों पर कूदने लगीं, चिड़ियाँ चहचहा उठीं, तितलियों ने अपने पंख फैलाकर आसमान में सह्रसों इंद्रधनुष बिखेर दिये थे. उस क्षण, संगीत केवल सुनाई नहीं दे रहा था—वह जिया जा रहा था, हर श्वास में, हर कंपन में, पूरी सृष्टि के साथ.

लू यिन ने उस पवित्र वीणा के माध्यम से प्रकृति की संपूर्ण महिमा को जीवंत कर दिया. संगीत ने न केवल कानों को, बल्कि हृदय और आत्मा को भी मंत्रमुग्ध कर दिया. यही वह शक्ति थी जो मानव और प्रकृति के अनंत संबंध को एक नए आयाम पर ले गई.

यह कहानी हमें बताती है कि प्रकृति हमारे भोग के लिए नहीं है. वह हमारे भीतर छिपी कला, सृजन और आध्यात्मिक आनंद की प्रेरणा है. और जब कोई सच्चे समर्पण से उसके साथ जुड़ता है, तो उसकी शक्ति अलौकिक रूप में प्रकट होती है.

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: #China, #chinastory, #featurestory, #folktales, #HINDI, #HindiLiterature, #hindistory, #history, #HistoryAndMyth, #indianpresshouse, #kahaniyan, #katha, #Literature, #magicalstories, #magicstory, #Mythology, #MythologyDrama, #MythologyMovies, #Nature, #purana, #StoryTelling, #themagicalinstrument
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article बॉलीवुड में शोक की लहर! कॉमेडी के बादशाह सतीश शाह का निधन हंसी की दुनिया में छा गया सन्नाटा! कॉमेडी के जादूगर सतीश शाह ने मुंबई में ली आखिरी सांस!
Next Article आज की चांदी का रेट त्योहारों की रौनक खत्म, अब ठंडी पड़ी चांदी! जानिए दिल्ली, लखनऊ और चेन्नई में आज के ताज़ा रेट

फीचर

View More

गणेश चतुर्थी स्पेशल: क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड की इस गुफा में आज भी मौजूद है बप्पा का असली सिर?

हर साल देश भर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र के मुंबई…

By news desk 5 Min Read

मुगलों से पहले भी था हरम का सिस्टम? जानिए किस सल्तनत में शुरू हुई शाही महिलाओं की यह व्यवस्था और कैसे तय होती थी रैंक

नई दिल्ली: हरम का नाम आते ही अक्सर मुगल बादशाहों और उनके…

5 Min Read

लाल सागर से बरसते बारूद का तांडव: जानिए कौन हैं यमन के हूती विद्रोही, जिनकी एक हुंकार से दहला सऊदी अरब!

यमन के सुलगते रेगिस्तान से उठी एक ऐसी आग, जिसने पूरी दुनिया…

5 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Trending Newsफीचर

गणेश चतुर्थी स्पेशल: क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड की इस गुफा में आज भी मौजूद है बप्पा का असली सिर?

हर साल देश भर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र के मुंबई…

5 Min Read
Latest Newsफीचर

मुगलों से पहले भी था हरम का सिस्टम? जानिए किस सल्तनत में शुरू हुई शाही महिलाओं की यह व्यवस्था और कैसे तय होती थी रैंक

नई दिल्ली: हरम का नाम आते ही अक्सर मुगल बादशाहों और उनके शाही महलों की तस्वीर सामने आती है। आम…

5 Min Read
Trending Newsफीचर

लाल सागर से बरसते बारूद का तांडव: जानिए कौन हैं यमन के हूती विद्रोही, जिनकी एक हुंकार से दहला सऊदी अरब!

यमन के सुलगते रेगिस्तान से उठी एक ऐसी आग, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनों को तेज कर दिया है! लाल…

5 Min Read
Trending Newsफीचर

हूतियों ने यमन से लाल सागर तक कैसे बढ़ाया अपना असर? कौन हैं ये विद्रोही, सऊदी अरब से क्यों छिड़ी जंग और ईरान से क्या है कनेक्शन?

सना: यमन के हूती विद्रोही एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष के केंद्र में हैं। कभी उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाके…

10 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?