नई दिल्ली/लखनऊ। मई का महीना आते ही पूरे उत्तर और मध्य भारत में सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं। दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक हालात ऐसे हैं कि दोपहर होते ही सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता है। देश के 22 से अधिक शहरों में पारा 45°C को पार कर चुका है, लेकिन ‘फील लाइक’ टेंपरेचर (महसूस होने वाली गर्मी) लोगों को इससे भी ज्यादा तपा रही है।
इस सीजन में उत्तर प्रदेश का बांदा शहर लगातार देश का सबसे गर्म इलाका बना हुआ है, जहां पारा 48.2°C तक जा पहुंचा है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले दिनों में यह तपिश 47 से 48 डिग्री के पार भी जा सकती है।
लेकिन भारत के मौसम विभाग का इतिहास गवाह है कि यह गर्मी तो बस एक झांकी है, देश इससे भी भयानक ‘अग्निकुंड’ का सामना कर चुका है जब पारा 50 डिग्री के पार चला गया था। आइए नजर डालते हैं देश के इतिहास के उन 5 सबसे गर्म सालों पर, जब सूरज ने सचमुच आग उगल दी थी।
साल 1956: अलवर (राजस्थान) में हाहाकार
1956
आज से करीब सात दशक पहले भी राजस्थान ने एक ऐसी ऐतिहासिक गर्मी देखी थी, जिसकी तपिश आज भी बुजुर्गों को याद है। साल 1956 में राजस्थान के अलवर में पारा 50.6°C रिकॉर्ड किया गया था। उस दौर में आज की तरह न तो एयर कंडीशनर (AC) थे और न ही पर्याप्त सुविधाएं, जिससे लोगों के लिए अस्तित्व बचाना बेहद मुश्किल हो गया था।
2016
भारतीय मौसम विज्ञान के इतिहास का सबसे डरावना और ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड साल 2016 में दर्ज हुआ। राजस्थान के फलोदी में तापमान 51°C तक पहुंच गया था, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर माना जाता है। उस दौरान हालात ऐसे थे कि डामर की सड़कें पिघलने लगी थीं और दोपहर में घर से बाहर कदम रखना जान जोखिम में डालने जैसा था।
2019
1 जून 2019 को राजस्थान के चूरू में पारा 50.8°C तक पहुंच गया, जो देश के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसी साल जैसलमेर के सीमावर्ती इलाके रामगढ़ में भी तापमान ने 50°C का आंकड़ा छू लिया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा था।
2022
इस साल (2026) सुर्खियां बटोर रहा उत्तर प्रदेश का बांदा शहर साल 2022 में भी पूरी दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में शामिल हुआ था। 15 मई 2022 को बांदा में तापमान 49°C तक पहुंच गया था। बुंदेलखंड का यह इलाका अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण लगातार भीषण हीटवेव की चपेट में रहता है।
2024
साल 2024 में एक बार फिर अल-नीनो के प्रभाव के चलते राजस्थान का फलोदी आग की भट्टी बन गया था। यहां एक बार फिर तापमान 50°C तक पहुंच गया। कई राज्यों को रेड अलर्ट जारी करना पड़ा था और स्कूलों में समय से पहले गर्मियों की छुट्टियां घोषित करनी पड़ी थीं।
वैश्विक स्तर पर बदल रहे मौसम के मिजाज से देश की राजधानी भी अछूती नहीं है। दिल्ली में इस बार अधिकतम तापमान 45.1°C दर्ज किया गया है, जो पिछले दो सालों में मई के महीने में सबसे ज्यादा है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, वर्तमान में वायुमंडल में कोई भी मजबूत वेदर सिस्टम (जैसे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव नहीं है। इसके चलते मैदानी इलाकों में सूखी और गर्म पछुआ हवाएं बिना किसी रुकावट के चल रही हैं, जिससे फिलहाल राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण भारत में हीटवेव के दिन और उनकी तीव्रता दोनों लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें और लगातार ओआरएस (ORS) या तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।
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