ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ali Khamenei) की अंतिम यात्रा इस समय दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक नया और बेहद तीखा बयान देकर सनसनी फैला दी है। ट्रंप ने न सिर्फ जनाजे में उमड़ी लाखों की भीड़ के आंसुओं को ‘नकली’ करार दिया, बल्कि यह भी खुलासा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक हफ्ते का ‘सीक्रेट’ युद्धविराम (Break) चल रहा है।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सुरक्षा कारणों से अली खामेनेई के बेटे और उनके संभावित उत्तराधिकारी मुज्तबा खामेनेई को लेकर भी एक बड़ी खबर सामने आई है।
अमेरिकी समाचार वेबसाइट Axios से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पुरानी धमकी को दोहराते हुए कहा कि ईरान की पूरी बची हुई लीडरशिप इस समय एक ही जगह पर मौजूद है। उन्होंने कहा, “एक शॉट में हम उन सभी को खत्म कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई बचेगा ही नहीं। वे डील करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।”
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ने बड़ा दिल दिखाते हुए ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी है। इस दौरान दोनों पक्षों में से कोई भी एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला को हरा दिया है और प्रतिबंधों के जरिए ईरान की कमर तोड़ दी है।
इस महा-जनाजे के बीच सबसे चौंकाने वाली खबर अली खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को लेकर आई है। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने ANI को दिए इंटरव्यू में पुष्टि की है कि मुज्तबा अपने पिता के अंतिम संस्कार की रस्मों में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं होंगे।
सुरक्षा का बड़ा खतरा: दरअसल, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने पहले ही बयान दिया था कि मुज्तबा खामेनेई उनकी ‘हिट लिस्ट’ (मौत के निशाने) पर हैं। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की कड़ी निगरानी और ड्रोन हमले के सीधे खतरे को देखते हुए ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने मुज्तबा को सार्वजनिक रूप से सामने न आने की सलाह दी है।
अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को एक अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में हुई थी। इस्लामिक नियमों के मुताबिक शव को 24 घंटे के भीतर दफनाया जाना चाहिए, लेकिन युद्ध की स्थिति और सुरक्षा कारणों से ऐसा नहीं हो सका।
ईरान ने इसके लिए 4 जुलाई का दिन चुना, जो कि संयोग से अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ है। इसे ईरान के एक कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम (Qom) में धार्मिक कार्यक्रम होंगे, जिसके बाद 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
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