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Hormuz Strait Toll: होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अब लगेगा शुल्क! ईरान का बड़ा ऐलान, ‘दोस्त देशों’ को मिलेगी खास रियायत

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बाद अब ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा संकेत दिया है। ईरान ने घोषणा की है कि इस रास्ते से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों से अब सेवा शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, तेहरान ने यह भी साफ किया है कि उसके मित्र देशों को इस व्यवस्था में विशेष रियायत दी जा सकती है।

ईरान के चीन स्थित राजदूत ने शनिवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अमेरिका की सहमति नहीं है।

60 दिन तक मुफ्त आवाजाही की थी व्यवस्था

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष समाप्त कराने के लिए हुई शुरुआती सहमति के तहत यह तय किया गया था कि वाणिज्यिक जहाज 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकेंगे। अब इस अवधि के बाद की व्यवस्था को लेकर ईरान नई नीति तैयार कर रहा है।

चीन की राजधानी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान ईरानी राजदूत ने बताया कि इस नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए ओमान के साथ समन्वय किया जा रहा है।

ईरान बोला- सेवा शुल्क लिया जाएगा

ईरानी राजदूत ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का एक हिस्सा ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आता है, इसलिए यहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे पारंपरिक टोल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उनके अनुसार, यह शुल्क समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, जहाजों की आवाजाही की निगरानी करने और बड़ी संख्या में गुजरने वाले जहाजों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रबंधन जैसी सेवाओं के लिए होगा।

मित्र देशों को मिल सकती है विशेष छूट

ईरान ने संकेत दिया है कि जो देश हालिया संकट के दौरान उसके साथ खड़े रहे, उन्हें नई शुल्क व्यवस्था में विशेष रियायत दी जा सकती है। राजदूत ने कहा कि ऐसे मित्र देशों के लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचती है।

हालिया पश्चिम एशियाई संघर्ष के दौरान ईरान ने इस मार्ग पर लगभग नाकाबंदी जैसी स्थिति बना दी थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली और तेल-गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई।

युद्धविराम के बाद बदली स्थिति

अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही पर लगी रोक हटाई गई। इसके बाद समुद्री परिवहन सामान्य होने लगा और दोनों पक्ष स्थायी समाधान को लेकर आगे की बातचीत कर रहे हैं।

vineet verma

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