नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों ने जंतर-मंतर पर जश्न मनाया। लंबे समय तक चले आंदोलन के दौरान कई अहम घटनाक्रम सामने आए। आंदोलन की शुरुआत एक डिजिटल अभियान से हुई और धीरे-धीरे यह राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बन गया। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की प्रमुख टाइमलाइन।
16 मई को हुई संगठन की शुरुआत
16 मई 2026 को अभिजीत दीपके ने व्यंग्यात्मक ऑनलाइन मंच के रूप में कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत की। कुछ ही दिनों में इसके सोशल मीडिया मंचों पर बड़ी संख्या में लोग जुड़ने लगे और अभियान को व्यापक पहचान मिलने लगी।
जंतर-मंतर पर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
6 जून को अभिजीत दीपके अमेरिका से लौटे और जंतर-मंतर पर छह घंटे का पहला विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों और समर्थकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
7 जून से 19 जून तक संगठन ने विभिन्न स्थानों पर धरना और डिजिटल अभियान चलाकर परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लगातार दोहराया।
20 जून से धरने ने पकड़ी रफ्तार
20 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ। अगले दिन अभिजीत दीपके ने नीट अभ्यर्थियों से पुनर्परीक्षा समाप्त होने के बाद आंदोलन में शामिल होने की अपील की। 22 से 27 जून के बीच लगातार छात्र और समर्थक प्रदर्शन स्थल पर पहुंचते रहे, हालांकि उस समय तक यह राष्ट्रीय मुद्दा नहीं बन पाया था।
सोनम वांगचुक के आने से आंदोलन को मिली नई ऊर्जा
28 जून को सोनम वांगचुक छह छात्रों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे और भूख हड़ताल शुरू की। इसके बाद आंदोलन को नई गति मिली। 30 जून से अभियान और तेज हुआ तथा जुलाई के पहले पखवाड़े में समर्थन लगातार बढ़ता गया।
पुलिस कार्रवाई के बाद और तेज हुआ विरोध
18 जुलाई को तड़के पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर कार्रवाई की और सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद अभिजीत दीपके ने अनशन की घोषणा की, जबकि राहुल गांधी ने भी समर्थन में बयान दिया।
19 जुलाई की शाम तक संसद मार्च की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचने लगे।
20 जुलाई को सबसे बड़ा टकराव
20 जुलाई को प्रदर्शन में 50 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस दौरान हिंसा और पत्थरबाजी की घटनाएं भी हुईं, जिसमें 100 से अधिक प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए।
इसी दिन सीजेपी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा, लेकिन आंदोलन जारी रहा।
देशभर से जुटा समर्थन
21 से 25 जुलाई के बीच देशभर से लोग जंतर-मंतर पहुंचते रहे। कई विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया। 21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
22 से 25 जुलाई के बीच सुरक्षा कारणों से विरोध स्थल के आसपास दिल्ली मेट्रो के एक दर्जन से अधिक स्टेशन बंद रखे गए।
सरकार से बातचीत और बढ़ा दबाव
23 और 24 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून लाने का आश्वासन दिया। इसी दौरान सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना अनशन समाप्त किया।
24 जुलाई को सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच एक और बैठक हुई। प्रतिनिधिमंडल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए सरकार को फैसला लेने के लिए 24 घंटे का समय दिया। देर रात प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए फिर छात्रों को संबोधित किया।
25 जुलाई को आया निर्णायक मोड़
25 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। इसी दिन दोपहर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद आंदोलन के समर्थकों ने इसे अपनी बड़ी सफलता बताया।