Trending News

खजुराहो की मिट्टी, प्रेम और मानवीय रिश्तों की महक! डॉ. उत्कर्ष सिन्हा की ‘खजुराहो डायरीज़’ बनी पाठकों की पसंद

वरिष्ठ पत्रकार और चर्चित लेखक डॉ. उत्कर्ष सिन्हा की नई पुस्तक “खजुराहो डायरीज़” इन दिनों साहित्य जगत में खास चर्चा का विषय बनी हुई है. अपने आकर्षक शीर्षक और गहन कथावस्तु के कारण यह पुस्तक न केवल पाठकों को खजुराहो की प्राचीन भव्यता से जोड़ती है, बल्कि मनुष्य के भीतर बसे प्रेम, अकेलेपन, स्मृतियों और रिश्तों के सूक्ष्म आयामों को भी मार्मिक रूप से उजागर करती है.

लेखक डॉ. उत्कर्ष सिन्हा ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में खजुराहो को City of Love कहा जाता है. उन्होंने बताया कि यूरोप और पश्चिमी देशों के पर्यटक वहां की मूर्तियों और कला को देखकर इसकी सराहना करते हैं, लेकिन भारतीय पर्यटकों में खजुराहो को लेकर अभी भी थोड़ी हिचकिचाहट पाई जाती है. अगर आप ध्यान दें तो उस शांत जगह में कई किरदार हैं, जो अपने आप में अलग-अलग कहानियां बयां करते हैं.

समय-समय पर की गई यात्राओं में मैंने इन किरदारों को गहराई से महसूस किया. इसके बाद मुझे यह समझ आया कि प्रेम की बुनियाद को जानना जरूरी है. मैंने महसूस किया कि खजुराहो की यौन मूर्तियां इस कहानी का आधार नहीं हैं, लेकिन यह आपकी कहानी को गति देती हैं।

जो कुछ भी मैंने लिखा है, वह हर किरदार की अलग पहचान और भावनाओं को दर्शाता है. ये किरदार पाठकों के जीवन में भी कहीं न कहीं मौजूद हैं. लोग मेरी किताब पढ़कर बार-बार पूछ रहे हैं कि इस कहानी में महिला पात्र मुख्य भूमिका में हैं, लेकिन पुरुष क्यों नहीं?इसका सीधा जवाब है कि पुरुष इस तरह के मुद्दों पर खुलकर बात कर सकते हैं, जबकि महिलाएं ऐसी बातों पर अपनी राय व्यक्त करने से बचती हैं.

महिला प्रेम और चाह से अछूत नहीं होती, लेकिन संवेदनशील विषयों पर खुलकर बोलना उनके लिए आसान नहीं होता. इसी दृष्टिकोण को आधार बनाकर मैंने यह पुस्तक लिखी है.

प्रसिद्धि पाने वाले ‘खजुराहो’ को भले ही विश्व पर्यटन मानचित्र पर उसके भव्य मंदिरों और कामुक नक्काशियों ने विशेष पहचान दी हो, लेकिन डॉ. सिन्हा अपने लेखन में इस ऐतिहासिक स्थल को केवल एक पर्यटन केंद्र तक सीमित नहीं रहने देते। बल्कि वे खजुराहो को मानवीय भावनाओं और संवेदनाओं की गहन पड़ताल का जीवंत मंच बना देते हैं.

उपन्यास का कथानक लेखक रणजीत कुमार के इर्द-गिर्द घूमता है, जो दिल्ली की उथल–पुथल भरी ज़िंदगी से दूर अपनी नई कहानी की तलाश में खजुराहो पहुँचता है. यहाँ वासंती, कैथरीन, जूही, सुनंदा, मालती, एवेलिन और राम प्रसाद जैसे विविध पात्र उसकी दुनिया में प्रवेश करते हैं. ये सभी चरित्र-अपनी पृष्ठभूमियों, इच्छाओं और संघर्षों के साथ-उपन्यास में उसी तरह जीवंत होकर उभरते हैं जैसे खजुराहो की दीवारों पर उकेरी मूर्तियाँ.

कहानी में भाषा की सहजता और चित्रण का ऐसा प्रभाव है कि पाठक खुद को खजुराहो की तंग गलियों, मंदिरों के आँगन और जीवन की अनकही कहानियों के बीच महसूस करने लगता है. वासंती का फ़िल्टर कॉफ़ी परोसना हो, कैथरीन का भावनात्मक द्वंद्व, जूही का मासूम मुस्कुराना या राम प्रसाद का समर्पण-हर प्रसंग प्रेम और मानवीय रिश्तों को नए अर्थ देता है.

चंदेल काल के खजुराहो मंदिरों की कामकला और आध्यात्मिक प्रतीकों को लेखक ने ऐसे शब्दों में पिरोया है कि पाठक उन्हें केवल पढ़ता नहीं, बल्कि देखता, सुनता और महसूस करता है. कहानी कहीं नदी की तरह बहती है, तो कहीं ठहरकर जीवन और प्रेम पर गहन चिंतन का अवसर देती है.

इतना ही नहीं, ‘खजुराहो डायरीज़’ को लेकर पाठकों में ऐसा क्रेज देखने को मिल रहा है कि हाल ही में गोरखपुर में शुरू हुए राष्ट्रीय पुस्तक मेले में इस किताब ने मानो लोकप्रियता के नए कीर्तिमान ही गढ़ दिए. मेले के पहले ही दिन स्टॉल पर इसकी प्रतियाँ हाथों-हाथ बिकती रहीं और पाठकों में इसे खरीदने की होड़ सी मच गई. साहित्य प्रेमियों की भीड़, किताब को लेकर उत्साह और लेखक के प्रति बढ़ती जिज्ञासा-सब मिलकर इस बात का प्रमाण बन गए कि ‘खजुराहो डायरीज़’ इस समय हिंदी पाठकों की पहली पसंद बन चुकी है.

“खजुराहो डायरीज़” अपनी सुंदर और संवेदनशील भाषा, पात्रों की जीवंतता और विषय की गहराई के कारण आधुनिक पाठक के दिल को छू लेती है। प्रेम को एक दर्शन में बदलते हुए यह उपन्यास बताता है कि मनुष्य का हर रिश्ता, हर स्मृति और हर इच्छा-जीवन को एक नई दिशा दे सकती है.

अगर आप भारतीय संस्कृति, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं को साहित्यिक रूप में महसूस करना चाहते हैं, तो “खजुराहो डायरीज़” निश्चित रूप से एक ऐसा अनुभव है, जिसे मिस नहीं किया जाना चाहिए.

news desk

Recent Posts

अब रोबोट ही बनाएंगे रोबोट! चीन की इस फैक्ट्री में हर 10 मिनट में तैयार हो रहा एक ह्यूमनॉइड

बीजिंग: चीन ने रोबोटिक्स और ऑटोमेशन की दुनिया में एक और बड़ा कदम उठाया है.…

35 minutes ago

क्या आपके घर के सामने भी लगा है पपीते का पेड़? वास्तु के हिसाब से कहीं गलत दिशा में तो नहीं, जानें किस ओर लगाने से आती है सुख-समृद्धि

नई दिल्ली: घर में पेड़-पौधे लगाना न सिर्फ हरियाली बढ़ाता है, बल्कि वास्तु शास्त्र में…

1 hour ago

नेपोटिज्म के बीच आलिया का चौंकाने वाला दांव! चार नए चेहरों को लॉन्च कर ओटीटी पर ला रहीं रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म

बॉलीवुड में नेपोटिज्म की बहस के बीच अक्सर स्थापित सितारों पर सवाल उठते हैं, लेकिन…

2 hours ago

राधा रानी को किसने और क्यों दिया था श्रीकृष्ण से 100 साल के वियोग का श्राप? जानिए क्या है इसके पीछे की पूरी कथा

मथुरा: राधा अष्टमी के अवसर पर राधा रानी की पूजा-अर्चना के साथ उनसे जुड़ी पौराणिक…

2 hours ago