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बदल गया सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का चेहरा! जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा बने नए सदस्य, जानें अब कैसा होगा जजों की नियुक्ति का पूरा समीकरण

news desk
Last updated: July 1, 2026 12:32 pm
news desk
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देश की न्यायपालिका और जजों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति, तबादले की रूपरेखा तय करने वाली सबसे शक्तिशाली संस्था ‘सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम’ का पुनर्गठन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ मैजिस्ट्रेट, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी का लगभग पांच साल का शानदार कार्यकाल पूरा होने और उनके रिटायर होने के बाद अब जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा को कॉलेजियम के पांचवें सदस्य के रूप में शामिल कर लिया गया है।

Contents
कैसा होगा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया स्वरूप?वकालत से सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज बनने तक का सफरNJAC और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निभाई अहम भूमिकाक्या है कॉलेजियम व्यवस्था और क्यों होता है इस पर विवाद?

सुप्रीम कोर्ट के पांचवें सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश होने के नाते, जस्टिस नरसिम्हा 2 मई, 2028 को अपनी सेवानिवृत्ति तक इस महत्वपूर्ण और नीति-निर्धारक संस्था का हिस्सा बने रहेंगे।

कैसा होगा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया स्वरूप?

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की विदाई के बाद, अब पांच सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया ढांचा इस तरह है:

जस्टिस सूर्य कांत (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया)

जस्टिस विक्रम नाथ

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा

वकालत से सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज बनने तक का सफर

3 मई, 1963 को हैदराबाद में जन्मे जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा का कानूनी और अकादमिक सफर बेहद प्रेरणादयी रहा है। उन्होंने हैदराबाद के निजाम कॉलेज से अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन में ग्रेजुएशन की डिग्री ली, इसके बाद, साल 1988 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की।

शुरुआती दिनों में उन्होंने हैदराबाद के सिविल कोर्ट, ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट में अपनी वकालत की धार तेज की, जिसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट आ गए। उनकी कानूनी विशेषज्ञता को देखते हुए साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्ण न्यायालय ने उन्हें ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ मनोनीात किया। उनके करियर में सबसे ऐतिहासिक मोड़ 31 अगस्त, 2021 को आया, जब उन्हें बार से सीधे पदोन्नत करके सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

NJAC और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निभाई अहम भूमिका

जस्टिस नरसिम्हा के नाम कई बड़ी व्यावसायिक उपलब्धियां दर्ज हैं। साल 2014 में उन्हें भारत का एडिशनल सॉलिसिटर जनरल “ASG” नियुक्त किया गया था। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग “NJAC” जैसे कई बेहद जटिल और ऐतिहासिक संवैधानिक मामलों में देश की शीर्ष अदालत की सहायता की। इसके अलावा, वे कनाडा गए सुप्रीम कोर्ट के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा रहे, जहां उन्होंने एक्स्ट्राडिशन और पर्यावरण जैसे गंभीर विषयों पर अपना अकादमिक शोध पत्र प्रस्तुत किया था।

क्या है कॉलेजियम व्यवस्था और क्यों होता है इस पर विवाद?

भारत में कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद हुई थी। इस आंतरिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों का समूह देश के सर्वोच्च न्यायालय और 25 राज्यों के हाई कोर्ट में जजों की नियुक्तियों और तबादलों की सिफारिश तैयार कर केंद्र सरकार को भेजता है।

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TAGGED: CJI, Collegium System, Constitutional Law, Indian Judiciary, IndianPressHouse, indianpresshouse news, Judge Appointment Process, Judicial Appointments, Judiciary Reorganization, Justice PS Narasimha, Justice Surya Kant, Legal News India, Senior Advocates, Supreme Court Collegium, Supreme Court India, Trending News
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