पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संगठन में किसी भी बड़े फेरबदल की अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।
आलाकमान ने साफ कर दिया है कि वर्तमान नेतृत्व ही जिम्मेदारी संभालेगा। लेकिन इस फैसले के तुरंत बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है, जिससे राज्य की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरण बनने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
‘जो होना है, वह होकर रहेगा’ – मनीष तिवारी का सोशल मीडिया पोस्ट वायरल
हाईकमान के फैसले के अगले ही दिन (2 जुलाई), मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक बेहद ही तीखा और रहस्यमयी पोस्ट साझा किया। राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को उनके कांग्रेस छोड़ने की अटकलों और भविष्य के राजनीतिक कदम से जोड़कर देखा जा रहा है।
तिवारी ने तंज कसते हुए लिखा “है बड़ा कोई अवगुण उसमें, जिसे कोई हुनर आवे। काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का भी कोई अचूक इलाज होता।”
उन्होंने आगे भावुक होते हुए लिखा कि पिछले 45 वर्षों में उन्हें कांग्रेस से बहुत कुछ मिला है और उन्होंने भी अपना पूरा वयस्क जीवन पार्टी की सेवा में समर्पित किया है। हालांकि, पोस्ट की आखिरी लाइन ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, जहां उन्होंने मशहूर अंग्रेजी गाने की पंक्ति लिखी— ‘Que sera, sera, Whatever will be, will be…’ (यानी, जो होना है, वह होकर रहेगा)।
आलाकमान का फैसला: किसे क्या मिली जिम्मेदारी?
कांग्रेस ने 1 जुलाई को स्पष्ट कर दिया कि पंजाब में पुरानी टीम पर ही भरोसा जताया जाएगा। पार्टी द्वारा घोषित नई संगठनात्मक रूपरेखा इस प्रकार है:
| नेता का नाम | पद / जिम्मेदारी |
| अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग | अध्यक्ष, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) |
| प्रताप सिंह बाजवा | नेता, कांग्रेस विधायक दल (CLP) |
| चरणजीत सिंह चन्नी | अध्यक्ष, चुनाव अभियान समिति |
| सुखजिंदर सिंह रंधावा | अध्यक्ष, कोर कमेटी |
| विजय इंदर सिंघला | अध्यक्ष, चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति |
| अमर सिंह (सांसद) | अध्यक्ष, घोषणापत्र समिति |
इसके अलावा संगठन को मजबूती देने के लिए सुखविंदर सिंह डैनी, राजकुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत सिंह और धर्मवीर गांधी को चुनाव अभियान समिति का सह-अध्यक्ष बनाया गया है।