ग्लोबल इकोनॉमी के स्लोडाउन और मार्केट के हर चैलेंज को क्रैक करते हुए देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट ‘टाटा संस’ (Tata Sons) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 ‘FY26’ में धमाकेदार वापसी की है। पिछले साल के स्लो परफॉर्मेंस को पीछे छोड़ते हुए टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी ने इस बार करीब 32,000 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट बटोरा है।
इतना ही नहीं, इस बंपर मुनाफे के दम पर टाटा ट्रस्ट्स की झोली में जाने वाला डिविडेंड भी पिछले साल के मुकाबले दोगुने से ज्यादा होकर 3,000 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।
मंदी के दौर के बाद ‘सुपर रिटर्न’
अगर पिछले वित्त वर्ष (FY25) से तुलना करें, तो यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। FY25 में टाटा संस की कुल आमदनी 12% गिरकर 38,834 करोड़ और मुनाफा 24% घटकर ₹26,231 करोड़ रह गया था। लेकिन FY26 में कंपनी की कुल आय लगभग 42,000 करोड़ के स्तर को छू गई है, जो यह साफ करता है कि टाटा का ‘कमबैक प्लान’ पूरी तरह ट्रैक पर है।
इन बड़े फैक्टर्स ने बदली टाटा की किस्मत
पारंपरिक दिग्गजों का सहारा: TCS, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाइटन और टाटा स्टील जैसी ग्रुप की स्थापित कंपनियों से टाटा संस को लगभग 32,500 करोड़ का भारी-भरकम डिविडेंड मिला है।
नए कमर्शियल बिजनेस की उड़ान: टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का स्केल अब काफी बड़ा हो चुका है। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल चेन “क्रोमा” ने इस बार पॉजिटिव ऑपरेटिंग प्रॉफिट EBITDA दर्ज किया है।
घाटे पर लगाम: टाटा ग्रुप के लिए लंबे समय से सिरदर्द बनी एयर इंडिया का घाटा अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, और टाटा डिजिटल भी मुनाफे की राह पर आगे बढ़ चुकी है।
टाटा ट्रस्ट्स को मिला 3,000 करोड़ से ज्यादा का डिविडेंड
टाटा संस के इस शानदार प्रदर्शन का सीधा फायदा देश के परोपकारी कार्यों को मिलने जा रहा है। टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स को इस बार 3,000 करोड़ से अधिक का डिविडेंड मिलेगा। पिछले साल यह आंकड़ा महज 1,414.5 करोड़ रूपये पर सिमट गया था। इस फंड का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास के सामाजिक कार्यों में किया जाता है।
गेम-चेंजिंग डिसीजंस और टीम एफर्ट
ग्रुप के इस टर्नअराउंड पर टाटा संस के चेयरमैन ने टीम की पीठ थपथपाई है। वैश्विक मंदी और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए उन्होंने कहा: “भारत इस दशक में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। हमारी इस सफलता का राज तीन स्तंभों पर टिका है— शानदार एग्जीक्यूशन, बेहतरीन टीमवर्क और साहसिक फैसले।”
मौजूदा समय में 323 सब्सिडियरी, 39 एसोसिएट कंपनियों और 32 जॉइंट वेंचर्स को संभालने वाला टाटा साम्राज्य इस रिकॉर्ड मुनाफे के बाद भारतीय कॉर्पोरेट जगत में अपनी बादशाहत को और मजबूत कर चुका है।