प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन (Taslima Nasreen) लगभग दो दशक (20 साल) के लंबे लंबे निर्वासन के बाद एक बार फिर कोलकाता पहुंचीं। शनिवार (1 अगस्त) को रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए वह बेहद भावुक नज़र आईं। उन्होंने कहा कि कोलकाता लौटकर उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वे अपनी ज़िंदगी के उसी छूटे हुए हिस्से में वापस आ गई हैं।
“अन्याय लंबा चल सकता है, लेकिन स्थायी नहीं”
अपने विचारों और लेखनी के कारण सालों तक निर्वासन झेलने वाली तसलीमा नसरीन ने अपने संबोधन में अभिव्यक्ति की आजादी पर जोर दिया।
तसलीमा नसरीन का बड़ा बयान: “मेरी वापसी इस बात का बड़ा सबूत है कि अन्याय लंबे समय तक रह सकता है, लेकिन वह स्थायी नहीं होता। मैं उस दिन का सपना देखती हूं जब भविष्य में किसी भी लेखक को सिर्फ अपने विचार रखने के लिए अपना देश छोड़ने पर मजबूर न होना पड़े।”
उन्होंने साफ किया कि उनका कोलकाता आने का कोई राजनीतिक मकसद नहीं है। वह किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में बोलने नहीं, बल्कि सिर्फ महिलाओं के अधिकारों (Women’s Rights) की आवाज बुलंद करने आई हैं।
‘यूरोप ने जगह दी, लेकिन बंगाल में ठिकाना न मिला’
तसलीमा ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि किसी भी अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया, फिर भी कट्टरपंथियों के विरोध के कारण उन्हें अपना घर-बार छोड़ना पड़ा।
- यूरोप का सहारा: उन्होंने कहा कि यूरोप ने उन्हें नागरिकता और सिर छिपाने की जगह दी, लेकिन बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में उन्हें रहने के लिए एक छोटा-सा ठिकाना तक नसीब नहीं हुआ।
- 2007 का वो खौफनाक दौर: गौरतलब है कि 1994 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद तसलीमा 2004 से 2007 तक कोलकाता में रही थीं। उनकी किताब ‘द्विखंडितो’ पर हुए भारी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा (Left Front) सरकार के समय नवंबर 2007 में उन्हें सुरक्षा कारणों से कोलकाता छोड़ना पड़ा था।
सुभेंदु अधिकारी ने दिया सुरक्षा का भरोसा
कार्यक्रम में मौजूद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन का स्वागत किया और उन्हें राज्य में पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया।
- पूरी सुरक्षा की गारंटी: मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रमुख और पुलिस प्रभारी के रूप में यह उनका कर्तव्य है कि जब भी तसलीमा बंगाल आएं, उन्हें सख्त सुरक्षा दी जाए।
- “अब बदल चुका है बंगाल”: उन्होंने कहा कि तसलीमा जब चाहें और जितनी बार चाहें पश्चिम बंगाल आ सकती हैं। अब राज्य में सरकार बदल चुकी है और यहां संविधान, मौलिक अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित है।