तेहरान: करीब एक महीने की शांति के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर संघर्ष तेज हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से हवाई हमले जारी हैं। इसी सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका ने ईरान पर बमबारी शुरू की, जिसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन, कुवैत समेत कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
दोनों देशों के बीच फिर शुरू हुई सीधी सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इसी बीच दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी हमले की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, नए हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी से अपनाई गई ‘टैंकर के बदले टैंकर’ नीति का हिस्सा हैं। इस रणनीति का सीधा संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा से बताया जा रहा है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान सरकार से जुड़े दो टैंकरों को निशाना बनाया है। खास बात यह है कि युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिका की ओर से टैंकरों को निशाना बनाने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। इससे पहले अमेरिकी कार्रवाई मुख्य रूप से नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिशों के खिलाफ होती रही है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिन टैंकरों को निशाना बनाया गया, वे ईरानी तट के पास अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी रेखा के दूसरी ओर खड़े थे। अमेरिकी ड्रोन से दागी गई मिसाइलें टैंकरों के इंजन कक्ष से टकराईं। इस कार्रवाई ने अमेरिका की बदली हुई सैन्य रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी के बाद की गई। नई रणनीति का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर ईरान के हमलों को रोकना है। यानी ईरान अगर समुद्री रास्ते से गुजरने वाले टैंकरों को निशाना बनाता है तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरान से जुड़े टैंकरों को निशाना बना सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि मंगलवार को किए गए हमलों में ईरान के करीब 100 ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें आईआरजीसी की वायु रक्षा व्यवस्था, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता और संचार से जुड़े ठिकाने शामिल बताए गए हैं।
इस बदलाव का सबसे अहम असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल का परिवहन होता है। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय संघर्ष के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से किया गया जवाबी हमला अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। ईरान ने 25 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से करीब आधी ही जॉर्डन के हवाई क्षेत्र तक पहुंच पाईं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इनमें से 10 मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया गया। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव में अब समुद्री रास्तों और टैंकरों को लेकर नया मोर्चा खुलता नजर आ रहा है।
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