मुंबई: बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने अपनी जिंदगी के उस फैसले का खुलासा किया है, जिसका मलाल उन्हें आज भी है। करीना ने बताया कि फिल्मों में करियर बनाने के लिए उन्होंने कक्षा 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। भले ही इसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में बड़ी सफलता हासिल की, लेकिन अधूरी शिक्षा की कमी उन्हें अब भी महसूस होती है। यही वजह है कि वह अपने बेटों तैमूर और जेह की पढ़ाई को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहतीं।
करीना ने हाल ही में एक बातचीत में अपने उस फैसले और उसके असर पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनके पास पढ़ाई जारी रखने का मौका था, लेकिन उन्होंने फिल्मों में आने का फैसला किया और 11वीं के बाद शिक्षा पूरी नहीं की।
करीना ने माना कि एक अभिनेत्री के तौर पर उन्हें कितनी भी सफलता क्यों न मिली हो, अपनी शिक्षा पूरी न कर पाने की बात हमेशा उनके मन में रही। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने दिल की सुनी और खुद को एक अभिनेत्री के रूप में साबित करने के लिए फिल्मी दुनिया का रास्ता चुना।
उनका कहना है कि लोग उनके इस फैसले का मजाक बना सकते हैं या अपनी राय दे सकते हैं, लेकिन उस समय वह अपने करियर को लेकर पूरी तरह दृढ़ थीं। हालांकि, आज पीछे मुड़कर देखने पर वह मानती हैं कि शिक्षा पूरी न करना उनके लिए पछतावे की बात है।
अपने अनुभव से सीख लेते हुए करीना अब अपने दोनों बेटों की पढ़ाई को लेकर काफी स्पष्ट हैं। वह चाहती हैं कि तैमूर और जेह आगे चलकर अपने मनपसंद क्षेत्र में जाएं और अपने सपनों को पूरा करें, लेकिन उससे पहले उनकी शिक्षा पूरी हो।
करीना ने बताया कि वह इसी वजह से अपने बेटों पर पहले पढ़ाई पूरी करने का दबाव बनाती हैं। उनका मानना है कि जिंदगी में अपने दिल की सुनना जरूरी है, लेकिन शिक्षा पूरी करने के बाद अपने सपनों की दिशा चुनना ज्यादा बेहतर है।
करीना ने बताया कि शिक्षा को लेकर उनका व्यक्तिगत अनुभव ही उन वजहों में से एक है, जिसके कारण वह भारत में युवा लड़कियों की शिक्षा का समर्थन करती हैं। जब यूनिसेफ ने भारत में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनसे जुड़ने की बात की, तो उन्हें यह पहल अपने अनुभव से बेहद करीब महसूस हुई।
करीना 2014 से यूनिसेफ इंडिया से जुड़ी हैं। वह लड़कियों की शिक्षा, लैंगिक समानता और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों की वकालत करती रही हैं।
करीना ने परोपकार और चैरिटी को लेकर अपनी सोच भी साझा की। उनका मानना है कि किसी को भी उसी कारण के लिए मदद करनी चाहिए, जिससे वह वास्तव में जुड़ाव महसूस करता हो। वह हर तरह के योगदान को सार्वजनिक रूप से बताने की जरूरत नहीं मानतीं।
करीना ने कहा कि कभी-कभी धर्मार्थ कामों के बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने में उन्हें असहजता होती है, क्योंकि परोपकार को लेकर कही गई बातों का गलत मतलब भी निकाला जा सकता है। उनका कहना है कि सैफ अली खान और उनके परिवार की ओर से किए जाने वाले काम शब्दों से ज्यादा दिल से जुड़े होते हैं।
करीना ने गर्मियों में क्रिकेट से जुड़ी एक चैरिटी पहल का हिस्सा बनने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने इसे खेल और परोपकार को एक साथ जोड़ने का अच्छा मौका बताया।
हाल ही में सैफ अली खान ने इंग्लैंड में ल्यूटन टाउन और इंडियंस क्रिकेट क्लब के बीच हुए एक चैरिटी मैच में हिस्सा लिया था। इस दौरान करीना के साथ उनके दोनों बेटे तैमूर और जेह भी सैफ का उत्साह बढ़ाने के लिए मौजूद थे।
करीना ने तैमूर और जेह की परवरिश के अनुभव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दो बेटों की मां बनना उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में खुद को अब एक फुटबॉल मॉम और क्रिकेट मॉम बताया।
अपनी बहन करिश्मा कपूर के साथ बड़ी हुईं करीना ने कहा कि बेटों की परवरिश ने उन्हें ऐसे कई अनुभवों से परिचित कराया है, जिनसे वह अपने बचपन में कभी नहीं गुजरी थीं।
काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसे…
मुंबई: इमरान हाशमी की 2007 में रिलीज हुई कल्ट फिल्म ‘आवारापन’ एक बार फिर सुर्खियों…
काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण जल-प्रलय और भूस्खलन ने कई इलाकों में…
उत्तर प्रदेश टी20 लीग (UP T20 League) के चौथे सीजन का रोमांच अपने चरम पर…
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने जा…
बिहार की सियासत में दिल्ली के होटल कांड को लेकर छिड़े विवाद के बीच जन…