ताजमहल को लेकर पुरानी बहस एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है. भाजपा के प्रवक्ता और अयोध्या से जुड़े नेता रजनीश सिंह ने आने वाली फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ पर गंभीर आरोप लगाए हैं और CBFC में शिकायत दर्ज कराई है. उनका कहना है कि यह फिल्म उनकी 2022 में दायर याचिका पर आधारित है. जिसमे उन्होंने ताजमहल के 22 बंद कमरों को खोलने और उसकी असल पहचान बताने की मांग की थी, जिसे कुछ लोग एक पुराने शिव मंदिर से जोड़ते हैं. रजनीश सिंह का आरोप है कि फिल्म इस विषय को गलत तरीके से दिखा सकती है. उन्होंने फिल्म के प्रमोशन, सेंसर प्रक्रिया और रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो धार्मिक और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है.
रजनीश सिंह ने सोमवार को अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने अक्टूबर 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने ASI की मदद से एक समिति बनाने, ताजमहल के इतिहास की जांच करने और उसके 22 बंद कमरों को खोलने की मांग की थी. उनका कहना है कि उनका मकसद सिर्फ सच्चाई और पारदर्शिता लाना था. रजनीश सिंह का कहना है कि अब उन्हें पता चला है कि फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ इसी विषय पर बनाई जा रही है. उनका आरोप है कि फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर और विज्ञापन में उनकी याचिका का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है और यह उनकी इजाज़त के बिना हुआ है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का व्यावसायिक इस्तेमाल गलत है, क्योंकि इससे अदालत का काम प्रभावित हो सकता है और धर्म के नाम पर झगड़ा बढ़ सकता है. सिंह ने कहा है कि फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट की जांच की जाए, ताकि यह पता चल सके कि क्या इसमें उनकी याचिका या किसी और की सोच-समझ से जुड़ी चीज़ का बिना इजाज़त इस्तेमाल किया गया है. जांच पूरी होने तक प्रचार और रिलीज पर रोक लगाने की अपील की गई है.
याचिका का पुराना विवाद, अदालत ने ‘मॉकरी’ कहा था
रजनीश सिंह की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मई 2022 में खारिज हो चुकी है. कोर्ट ने इसे ‘पीआईएल सिस्टम की मॉकरी’ बताते हुए खारिज कर दिया था और कहा था कि ऐतिहासिक मुद्दे इतिहासकारों के लिए हैं, न कि अदालत के. सिंह ने दावा किया था कि ताजमहल मूल रूप से ‘तेजो महालय’ नामक शिव मंदिर था, जो मुगल सम्राट शाहजहां ने कब्जा कर मकबरा बना दिया. यह थ्योरी मूल रूप से 1989 में पीएन ओक की किताब ‘ताजमहल द ट्रू स्टोरी’ से प्रेरित है, जिसे इतिहासकारों और एएसआई ने बार-बार खारिज किया है. 2018 में एएसआई ने स्पष्ट किया था कि ताजमहल शाहजहां द्वारा मुमताज़ बेगम की याद में बनवाया गया मकबरा है.
पोस्टर से शुरू हुई आलोचना
‘द ताज स्टोरी’ एक कोर्टरूम ड्रामा फिल्म है, जिसे तुषार अमरीश गोयल ने लिखा और डायरेक्ट किया है, जबकि इसे सुरेश झा ने प्रोड्यूस किया है. फिल्म में परेश रावल मुख्य भूमिका में हैं और उनके साथ ज़ाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास और स्नेहा वाघ भी नजर आएंगे. हाल ही में इसका ट्रेलर रिलीज हुआ, जिसमें ताजमहल के “असली इतिहास” को दिखाने की बात कही गई है. इससे पहले सितंबर 2025 में रिलीज हुए मोशन पोस्टर में ताजमहल के गुंबद से भगवान शिव की मूर्ति निकलती हुई दिखाई गई थी, जिससे सोशल मीडिया पर काफी विवाद हुआ. कई लोगों ने इसे ‘प्रचार फैलाने वाला’ और ‘हिंदुत्व विचारधारा’ को बढ़ावा देने वाला बताया. विवाद बढ़ने के बाद फिल्ममेकर्स ने सफाई दी कि यह फिल्म किसी धर्म से जुड़ी नहीं है और न ही यह दावा करती है कि ताजमहल एक शिव मंदिर था. लेकिन विषय के संवेदनशील होने की वजह से CBFC ने सख्त जांच की. सितंबर 2025 में मेकर्स को ऐतिहासिक दस्तावेज जमा करने पड़े, और कई महीनों की जांच के बाद फिल्म को मंजूरी मिली. इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, यह फिल्म भी ‘वैक्सीन वॉर’ या ‘बंगाल फाइल्स’ जैसी विवादित फिल्मों में से एक बन सकती है.