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यूपी गैंगस्टर एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कानून को बताया ‘बेकार’, जानिए पूरा विवाद, प्रावधान और हाई कोर्ट का रुख

news desk
Last updated: August 21, 2026 2:06 pm
news desk
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उत्तर प्रदेश के ‘यूपी गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस कानून के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘शुरुआत से ही बेकार’ करार दिया है।

Contents
1. सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट पर क्या सवाल उठाए?2. यूपी गैंगस्टर एक्ट (1986) क्या है और यह किस पर लागू होता है?3. कानून की सबसे बड़ी ताकत: संपत्ति कुर्क (Attachment of Property) करने का अधिकार4. गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग और विवाद के मुख्य कारण5. अन्य राज्यों में संगठित अपराध के खिलाफ बने कानून

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दो वकीलों के खिलाफ चल रही गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति पर ‘गैंगस्टर’ का लेबल लगाकर उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता या सजा नहीं दी जा सकती।

1. सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट पर क्या सवाल उठाए?

  • कोई अलग अपराध तय नहीं करता: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड कानून (Criminal Law) के तहत कार्रवाई करने के लिए कानून को खुद में एक विशिष्ट अपराध परिभाषित करना चाहिए। 1986 का यह अधिनियम कोई नया आपराधिक अपराध नहीं बनाता, बल्कि केवल धारा 2 (b) और (c) के तहत ‘गैंग’ और ‘गैंगस्टर’ की परिभाषा देकर किसी व्यक्ति की स्थिति तय करता है।
  • निर्दोषों के खिलाफ इस्तेमाल की आशंका: हिंसा और संगठित अपराध रोकने के लिए बने इस कानून का इस्तेमाल सही प्रक्रिया का पालन न होने पर निर्दोष नागरिकों के खिलाफ भी हो सकता है।
  • कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन: पीठ ने कहा कि “बिना अपराध के कोई सजा नहीं हो सकती।” सही मकसद का हवाला देकर गलत या कमजोर कानूनी तरीकों को जायज नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब वे किसी नागरिक की व्यक्तिगत आजादी को प्रभावित करते हों।

2. यूपी गैंगस्टर एक्ट (1986) क्या है और यह किस पर लागू होता है?

इस कानून को संगठित अपराध, आदतन अपराधियों और गिरोहों (Gangs) पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया था।

  • किसे माना जाता है गैंग/गैंगस्टर: ऐसे व्यक्तियों का समूह जो डर, हिंसा, जबरन वसूली, धोखाधड़ी, तस्करी, या अन्य गैर-कानूनी तरीकों से आर्थिक या भौतिक लाभ प्राप्त करते हैं। इसमें गिरोह का सरगना, सदस्य ही नहीं, बल्कि उनकी मदद या सहयोग करने वाला व्यक्ति भी शामिल किया जा सकता है।
  • कार्रवाई की प्रक्रिया: पुलिस आरोपी का एक ‘गैंग चार्ट’ तैयार करती है, जिसमें उसके पुराने मामलों और आपराधिक गतिविधियों का ब्योरा होता है। सक्षम अधिकारी से स्वीकृति मिलने के बाद केस दर्ज होता है।
  • सजा का प्रावधान: दोष सिद्ध होने पर 2 से 10 साल तक की जेल हो सकती है।

3. कानून की सबसे बड़ी ताकत: संपत्ति कुर्क (Attachment of Property) करने का अधिकार

इस एक्ट की धारा 14 जिला मजिस्ट्रेट (DM) को यह अधिकार देती है कि यदि यह विश्वास हो कि कोई चल या अचल संपत्ति अपराध से अर्जित की गई है, तो उसे जब्त/कुर्क किया जा सकता है।

  • आंकड़े: राज्य सरकार के आंकड़ों (अक्टूबर 2025 तक) के अनुसार, 2017 से अक्टूबर 2025 के बीच गैंगस्टर एक्ट के तहत 26,920 मुकदमे दर्ज हुए, 80,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं और करीब 14,467 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं।

4. गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग और विवाद के मुख्य कारण

  • सामान्य अपराधों में भी इस्तेमाल: इस कानून की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि पुलिस मामूली या सामान्य आपराधिक मामलों (जैसे चोरी या व्यक्तिगत वित्तीय विवाद) में आरोपी लोगों पर भी गैंगस्टर एक्ट लगा देती है।
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख (जून 2026): इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद के राजेंद्र त्यागी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में परिवार पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि महज दो वित्तीय विवादों के आधार पर गैंगस्टर कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है।

5. अन्य राज्यों में संगठित अपराध के खिलाफ बने कानून

उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर एक्ट की तर्ज पर भारत के कई अन्य राज्यों में भी विशेष कानून लागू हैं:

  • महाराष्ट्र: मकोका (MCOCA – Maharashtra Control of Organised Crime Act)
  • कर्नाटक: केकोका (KCOCA)
  • गुजरात: गुज्सीटोक (GUJCTOC)
  • राजस्थान: आरसीओसी (RCOC – 2023)

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TAGGED: Supreme Court, UP Gangster Act, Up News, इलाहाबाद हाई कोर्ट, कानून विवाद, गैंगस्टर एक्ट, जस्टिस जेबी पारदीवाला, मकोका, यूपी गैंगस्टर एक्ट, यूपी पुलिस, योगी आदित्यनाथ, संपत्ति कुर्क, सुप्रीम कोर्ट
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