झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो (Devendra Nath Mahto) का JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन गुरुवार (13 अगस्त, 2026) को 12वें दिन में प्रवेश कर गया है। रांची के सदर अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद महतो का सत्याग्रह जारी है।
अस्पताल के बेड से महतो ने रांची सदर अस्पताल के सिविल सर्जन को एक भावुक पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि उन्हें तुरं डिस्चार्ज किया जाए ताकि वे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर अपने साथी छात्रों के बीच वापस लौट सकें।
- 12वें दिन भी अनशन जारी: अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती रहने के बावजूद देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया है।
- सिविल सर्जन को लिखा पत्र: महतो ने डॉक्टरों से अनुरोध किया है कि उन्हें डिस्चार्ज कर आंदोलन स्थल (जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम) भेजा जाए, जहाँ वे चिकित्सीय सलाह और इलाज जारी रखेंगे।
- लाठीचार्ज में हुए थे घायल: 10 अगस्त को हुए ‘विधानसभा घेराव’ प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने और ब्लड शुगर स्तर घटने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
- छात्रों की प्रमुख मांगें: JSSC-CGL समेत विवादित परीक्षाओं की सीबीआई (CBI) जांच, परीक्षाओं को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक पारदर्शिता की मांग शामिल है।
“मेरी देह अस्पताल में, पर आत्मा सत्याग्रह स्थल पर है”
सिविल सर्जन को लिखे अपने हस्तलिखित आवेदन में देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी मानसिक पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा:
“अस्पताल के बेड पर मेरी देह का इलाज चल रहा है, लेकिन मेरी आत्मा और संकल्प सत्याग्रह स्थल पर है, जहाँ झारखंड के हज़ारों युवा अपने न्याय और सुरक्षित भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि हज़ारों छात्रों के भरोसे की ज़िम्मेदारी है। अस्पताल में आराम करना मेरे लिए शारीरिक पीड़ा से कहीं अधिक मानसिक कष्ट दे रहा है।”
महतो ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया है कि वे धरना स्थल पर रहकर भी समय-समय पर आवश्यक मेडिकल चेक-अप और दवाइयों की खुराक लेते रहेंगे।
क्या है पूरा विवाद?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे CGL, PGT) में धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर पिछले दो हफ्तों से रांची में हजारों छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 10 अगस्त को हुए उग्र प्रदर्शन के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है, जहाँ विपक्ष सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगा रहा है।