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बारिश में हर बुखार वायरल नहीं! ऐसे पहचानें डेंगू, मलेरिया या वायरल फीवर, डॉक्टर ने बताया कब कराएं जांच

गुरुग्राम: मानसून के मौसम में बुखार, सर्दी-जुकाम और संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। इसी दौरान डेंगू और मलेरिया का खतरा भी अधिक रहता है। परेशानी यह है कि इन तीनों बीमारियों के शुरुआती लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं, जिससे सही बीमारी की पहचान करना आसान नहीं होता। संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

डेंगू में किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू की शुरुआत अक्सर अचानक तेज बुखार से होती है। इसके साथ तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द तथा अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है। कई मरीजों में मतली, उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते भी दिखाई देते हैं।

अगर पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, असामान्य सुस्ती या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे गंभीर संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मलेरिया के लक्षण कैसे अलग होते हैं?

मलेरिया में आमतौर पर तेज बुखार के साथ ठंड लगना, कंपकंपी होना और उसके बाद पसीना आना प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। इसके अलावा सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी और कुछ मामलों में उल्टी की शिकायत भी हो सकती है। हालांकि हर मरीज में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।

वायरल फीवर में क्या संकेत मिलते हैं?

सामान्य वायरल फीवर में बुखार के साथ गले में खराश, खांसी, नाक बहना, शरीर में दर्द और थकान अधिक देखने को मिलती है। लेकिन डेंगू, मलेरिया और वायरल संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में समानता होने के कारण खुद से बीमारी तय करना जोखिम भरा हो सकता है।

किन परिस्थितियों में तुरंत जांच करानी चाहिए?

यदि तेज बुखार कई दिनों तक बना रहे, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तेज सिरदर्द, कंपकंपी या डेंगू और मलेरिया का जोखिम हो तो बिना देरी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर सीबीसी, डेंगू की जांच, मलेरिया एंटीजन, स्मियर टेस्ट या अन्य जरूरी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। जांच का सही समय बीमारी और जांच के प्रकार के अनुसार तय किया जाता है।

समय पर जांच और इलाज से घटता है खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान किसी भी तेज बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही समय पर जांच कराने से बीमारी की पहचान जल्दी हो जाती है और इलाज भी समय रहते शुरू किया जा सकता है, जिससे गंभीर जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है।

vineet verma

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