नोएडा: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल उड़ान शुरू होने के साथ जेवर ने देश के विमानन नक्शे पर नई पहचान बना ली। इस ऐतिहासिक शुरुआत को और खास बनाने के लिए पहली उड़ान में उन किसानों को शामिल किया गया, जिन्होंने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन दी थी। इंडिगो का विमान 172 किसानों को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हुआ।
पहली उड़ान बनी सम्मान और इतिहास का प्रतीक
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुई पहली कमर्शियल फ्लाइट केवल एक विमान सेवा की शुरुआत नहीं रही, बल्कि उन परिवारों को सम्मान देने का अवसर भी बनी जिन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराई। लखनऊ पहुंचने के बाद इन किसानों की मुलाकात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से कराए जाने की भी तैयारी की गई।
सुबह से शुरू हुआ विमान संचालन का नया अध्याय
सुबह निर्धारित समय पर लखनऊ से रवाना हुई पहली उड़ान सफलतापूर्वक जेवर एयरपोर्ट पहुंची। इसके साथ ही नियमित हवाई सेवाओं का संचालन शुरू हो गया। इस शुरुआत को उत्तर भारत की कनेक्टिविटी के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है।
चार शहरों के लिए शुरू हुई उड़ान सेवा
शुरुआती चरण में यहां से लखनऊ के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद और अमृतसर के लिए उड़ानों का संचालन शुरू किया गया है। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से उड़ानों की संख्या और गंतव्यों का विस्तार किया जाएगा।
एक जुलाई से और बढ़ेगा नेटवर्क
योजना के मुताबिक अगले चरण में एयरपोर्ट को 16 शहरों से जोड़ने की तैयारी है। इसमें जयपुर, भोपाल, चंडीगढ़, बरेली, देहरादून, लखनऊ और नवी मुंबई समेत कई प्रमुख शहर शामिल किए जाएंगे। शुरुआती संचालन में इंडिगो और अकासा एयर अपनी सेवाएं देंगी।
उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बना
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ उत्तर प्रदेश को एक और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मिल गया है। इससे पहले राज्य में लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और अयोध्या से अंतरराष्ट्रीय सेवाएं संचालित हो रही हैं। माना जा रहा है कि यह एयरपोर्ट आने वाले समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूरे एनसीआर क्षेत्र के आर्थिक विकास में बड़ी भूमिका निभाएगा।
दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भरता होगी कम
जेवर एयरपोर्ट शुरू होने से अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के लाखों यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए दिल्ली पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे व्यापार, निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।