नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से बेलपत्र से जुड़े कुछ पारंपरिक उपाय करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां दूर होने के साथ सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। सावन के दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसी कारण शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान माना गया है।
मान्यता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा के दौरान चढ़ाए गए पांच बेलपत्रों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर उन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन की स्थिरता और आर्थिक मजबूती बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में घर या बगीचे में बेल और आक (मदार) का पौधा एक साथ लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान शिव और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होने तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होने की मान्यता है।
कुछ श्रद्धालु सावन के दौरान 1008 बेलपत्रों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर उन्हें शिवलिंग पर अर्पित करने का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि पूरे सावन में यह अनुष्ठान पूर्ण करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले लोग सावन में अपनी आयु के बराबर बेलपत्र लेकर उन्हें गाय के दूध में डुबोकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं। इसे संतान सुख और पारिवारिक खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।
मान्यता है कि सावन के दौरान बेलपत्र के वृक्ष के नीचे स्नान करना अत्यंत शुभ होता है। यदि ऐसा संभव न हो तो सावन सोमवार के दिन यह उपाय किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के बाद कम से कम तीन बेलपत्रों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर उन्हें तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक संकट दूर होने और घर में स्थायी समृद्धि आने की मान्यता है।
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