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92 के करीब पंहुचा रुपया, बाजार में बढ़ी चिंता ! FPI आउटफ्लो और डॉलर डिमांड ने बढ़ाया दबाव

भारतीय रुपये ने गुरुवार को डॉलर के मुकाबले नया निचला स्तर छू लिया। कारोबार के दौरान रुपया 91.99 प्रति डॉलर तक फिसल गया, जो अब तक का सर्वकालिक निचला स्तर है और 92 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से बेहद करीब माना जा रहा है। हालांकि, ऐन वक्त पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दखल ने रुपये को 92 के पार जाने से फिलहाल रोक दिया। बाजार में यह साफ दिखा कि गिरावट का दबाव काफी मजबूत है और केवल हस्तक्षेप से हालात पूरी तरह संभलते नजर नहीं आ रहे।

रुपये पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार निकासी से आया है। जनवरी महीने में ही एफपीआई करीब 35,989 करोड़ रुपये यानी लगभग 3.9 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। कुल मिलाकर विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 4.5 अरब डॉलर की निकासी की है, जिसका असर निफ्टी 50 में लगभग 5% की गिरावट के रूप में भी दिखा। इसके साथ ही आयातकों की चिंता भी बढ़ गई है। आगे और कमजोरी की आशंका को देखते हुए आयातक तेजी से हेजिंग कर रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग और बढ़ गई है। बुलियन आयात में इजाफा, अमेरिकी टैरिफ, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी, कमजोर निर्यात और बढ़ता चालू खाता घाटा—ये सभी वजहें मिलकर रुपये पर दबाव बना रही हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने हालात को और कठिन बना दिया है।

महंगाई से लेकर बजट तक, हर मोर्चे पर असर

रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। कच्चा तेल (जिसका करीब 85% भारत आयात करता है), इलेक्ट्रॉनिक्स, विदेशी शिक्षा और विदेश यात्रा जैसी चीजें महंगी हो जाती हैं। भले ही कमजोर रुपये से निर्यातकों को कुछ राहत मिलती हो, लेकिन कुल अर्थव्यवस्था पर इसका दबाव बढ़ता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी माना गया है कि रुपया अपनी वास्तविक क्षमता से नीचे कारोबार कर रहा है, हालांकि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है और हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता भी किया गया है।

बाजार जानकारों का मानना है कि अगर मौजूदा दबाव बना रहा तो रुपये में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। राहत की बात यह है कि RBI के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो जरूरत पड़ने पर स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजरें 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं, जहां रुपये को संभालने और अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले कदमों की उम्मीद की जा रही है।

news desk

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