नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में ईंधन की बिक्री और वितरण प्रणाली में बड़ा फेरबदल किया है। जारी की गई नई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, रिटेल पेट्रोल पंपों पर अब डीजल की बिक्री को लेकर सख्त पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। यह फैसला मुख्य रूप से ईंधन की कालाबाजारी रोकने और कमर्शियल वितरण को विनियमित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार द्वारा लागू की गई इन नई गाइडलाइंस का सीधा असर थोक ग्राहकों और बड़े वाहनों पर पड़ेगा…
आम जनता को इस फैसले से घबराने की जरूरत नहीं है। चूँकि अधिकांश निजी कारों के फ्यूल टैंक की क्षमता 200 लीटर से काफी कम होती है, इसलिए आम वाहन मालिकों को दैनिक ईंधन भरवाने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। इस आदेश का मुख्य प्रभाव उन लोगों और व्यवसायों पर पड़ेगा जो भारी ट्रकों, जनरेटरों या औद्योगिक मशीनों के लिए बड़े ड्रमों में डीजल ले जाते थे।
तकनीकी रूप से, जिसे हम सामान्य डीजल कहते हैं, वही हाई-स्पीड डीजल है। यह 750 RPM से अधिक गति वाले ऑटोमोबाइल इंजनों (कार, बस, ट्रक) के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाला मानक ईंधन है। इसका उपयोग कृषि मशीनों, निर्माण उपकरणों और पावर जनरेटर चलाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाने और कमर्शियल उपयोग के नाम पर हो रही अनधिकृत बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह रणनीतिक कदम उठाया है। अगले तीन महीनों तक देशभर के पेट्रोल पंपों को इन नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
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