नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर AK-47 के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेर लिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री से संसद में जवाब देने की मांग की।
प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की गई, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या प्रदर्शन करने वाले छात्र आतंकवादी थे, जिनके खिलाफ AK-47 जैसे हथियारों की जरूरत पड़ गई। उनके मुताबिक, छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल छात्राओं के परिवारों से संपर्क कर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे विरोध प्रदर्शन से दूर रहें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ अब भी FIR दर्ज की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी संसद में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार में AK-47 और दिल्ली में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल के आदेश किस स्तर पर दिए गए, सरकार को इसकी जानकारी सदन में देनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री इस पूरे मामले पर संसद में विस्तृत जवाब दें।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के दौरान कीलों वाली लाठियों और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जबकि बिहार में छात्रों के खिलाफ AK-47 दिखाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी कार्रवाई की अनुमति किसने दी।
समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने बिहार की घटना की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को बल प्रयोग से दबाना उचित नहीं है। वहीं, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सवाल उठाया कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों को अपराधी या आतंकवादी की तरह क्यों देखा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में बड़ी संख्या में छात्रों की गिरफ्तारी से भय का माहौल बना है।
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