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‘क्या प्रधानमंत्री भगवान हैं?’… छात्रों पर FIR को लेकर CJP का हमला, बोले- वादा निभाए सरकार, मजाक लोकतंत्र का हिस्सा

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन समाप्त होने के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया था, लेकिन कई राज्यों से कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं।

‘सरकार ने कार्रवाई न करने का भरोसा दिया था’

सौरव दास ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि पहले से दर्ज दो FIR वापस लेने और भविष्य में भी बदले की भावना से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। उनके मुताबिक, इस संबंध में सरकार से लिखित आश्वासन भी मांगा गया था, जिसकी समयसीमा मंगलवार तक है।

‘कई राज्यों में छात्रों को डिटेन किया जा रहा’

सीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि देश के कई राज्यों से छात्रों पर कार्रवाई की सूचनाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। सौरव दास का दावा है कि बिहार में अब तक करीब 500 FIR दर्ज होने की जानकारी उन्हें मिली है और कई मामलों में गंभीर धाराएं भी लगाई गई हैं।

‘सरकार अपना वादा पूरी तरह लागू करे’

सौरव दास ने कहा कि सरकार ने जो भरोसा दिया था, उसे पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि संगठन की मांग केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी, बल्कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां भी प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने की बात शामिल थी। उन्होंने कहा कि अब संगठन केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक पत्र का इंतजार कर रहा है और उम्मीद है कि यह निर्धारित समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराया जाएगा।

‘प्रधानमंत्री कोई भगवान नहीं’

दिल्ली पुलिस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां हटाने की कार्रवाई पर भी सौरव दास ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी टिप्पणी को आपत्तिजनक मानने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। उनके मुताबिक, यदि पुलिस को इस आधार पर सामग्री हटाने की खुली छूट दी जाती है तो इसका इस्तेमाल सेंसरशिप के औजार के रूप में हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक व्यक्तियों पर टिप्पणी और व्यंग्य भी अभिव्यक्ति का हिस्सा हैं।

vineet verma

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