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दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के रचनाकार खामोशी से विदा हुआ, नहीं रहे प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल

लखनऊ। प्रख्यात हिंदी साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। 89 वर्षीय विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया है।

बताया जा रहा है कि उनका इलाज रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चल रहा था। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था और वे एम्स के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती थे। मंगलवार को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

गौरतलब है कि पिछले महीने ही विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य में एक ऐसे लेखक के रूप में पहचाने गए, जिनकी वाणी भले ही बेहद धीमी थी, लेकिन उनकी रचनाएं पाठकों के मन में गहरी और दूर तक गूंज छोड़ जाती थीं।

कृषि विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने वाले शुक्ल जी ने मिट्टी, प्रकृति और हरियाली से जो आत्मीय संबंध बनाया, वही आगे चलकर उनकी रचनात्मक चेतना का मूल स्वर बन गया। उनके साहित्य की केंद्रीय चिंता हमेशा यही रही कि समाज और मनुष्य का जीवन कैसे अधिक संवेदनशील, मानवीय और बेहतर बनाया जा सकता है।

बेटे ने दी निधन की जानकारी

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार शाम निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके निधन की पुष्टि उनके पुत्र शाश्वत शुक्ल ने की।

शाश्वत शुक्ल ने समाचार एजेंसी पीटीआई–भाषा को बताया कि सांस लेने में तकलीफ के चलते 2 दिसंबर को उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान मंगलवार शाम 4 बजकर 48 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

विनोद कुमार शुक्ल के परिवार में उनकी पत्नी, पुत्र शाश्वत शुक्ल और एक पुत्री हैं।

प्रमुख पुरस्कार और सम्मान

  • गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप (मध्य प्रदेश शासन)
  • रजा पुरस्कार (मध्य प्रदेश कला परिषद)
  • शिखर सम्मान (मध्य प्रदेश शासन)
  • राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान (मध्य प्रदेश शासन)
  • दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान (मोदी फाउंडेशन)
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (भारत सरकार)
  • हिंदी गौरव सम्मान (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान)
  • मातृभूमि पुरस्कार, 2020 — ‘ब्लू इज लाइक ब्लू’ (अंग्रेजी कहानी संग्रह)
  • साहित्य अकादमी, नई दिल्ली का सर्वोच्च सम्मान महत्तर सदस्य (2021)
  • 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार, 2024 — समग्र साहित्य के लिए

news desk

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