नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इस साल लागू किए गए इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई कंट्रोल को वापस लेने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई थी। अब वैश्विक स्तर पर हालात सामान्य होने के बाद सरकार ने इन प्रतिबंधों को हटाने का निर्णय लिया है।
इस साल 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति पर पड़ा था। कई अंतरराष्ट्रीय सप्लायरों ने फोर्स मेज्योर क्लॉज का हवाला देते हुए गैस सप्लाई में कटौती कर दी थी। इससे भारत में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी।
इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई कंट्रोल लागू किया था, ताकि आवश्यक क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति बाधित न हो।
सरकार ने 9 मार्च 2026 को नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026 लागू किया था। इसके तहत देश में उत्पादित और आयातित प्राकृतिक गैस, एलएनजी और री-गैसिफाइड एलएनजी (RLNG) की आपूर्ति, आवंटन, वितरण और उपयोग को नियंत्रित किया गया।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराना था, ताकि जरूरी सेवाओं पर किसी तरह का असर न पड़े।
सरकार का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति में सुधार के बाद इमरजेंसी नियंत्रण की जरूरत नहीं रही। इसी वजह से अब इस विशेष व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि दुनिया के कई देश ईंधन संकट से जूझ रहे थे, लेकिन भारत ने समय रहते सही रणनीति अपनाकर इस चुनौती का प्रभावी तरीके से सामना किया।
उन्होंने कहा कि संकट की शुरुआत में ही सरकार ने हालात का सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई और देश के संसाधनों का संतुलित उपयोग किया, जिससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं होने दी गई।
प्रधानमंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले भारत करीब 25-26 देशों से ईंधन आयात करता था। संकट के दौरान भारत ने अपनी कूटनीतिक पहुंच का विस्तार किया और 40 से अधिक देशों से ईंधन आयात शुरू कर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता था, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति खाड़ी देशों से होती थी। युद्ध के कारण यह आपूर्ति लगभग रुक गई थी, लेकिन समय रहते रिफाइनरी क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक स्रोतों से आयात की रणनीति अपनाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
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