मध्य प्रदेश और राजस्थान में 20 से ज्यादा बच्चों की मौत से पूरे देश में हलचल मची हुई है. जांच में सामने आया कि इन मौतों की वजह बना जहरीला कोल्ड्रिफ कफ सिरप, जिसे बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा का मालिक रंगनाथन काफी समय से पुलिस की पकड़ से बच रहा था, आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है.
पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश में थी और उस पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था. अधिकारियों ने बताया कि रंगनाथन को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड के बाद उसे मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लाया जाएगा, जहां सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं.
एक महीने में 20 मासूमों की गई जान
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने खुलासा किया है कि बीते एक महीने में प्रदेश में 20 से अधिक बच्चों की मौत हुई हैं. इनमें ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के थे, जिनकी मौत किडनी फेलियर से हुई थी. जांच में सामने आया है कि सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 48.6% पाई गई, जो स्वीकृत सीमा से 500 गुना अधिक था. यह जहरीला रसायन आमतौर पर औद्योगिक कामों में इस्तेमाल होता है और थोड़ी मात्रा भी जानलेवा साबित होती है.
गंदगी और लापरवाही से भरा था प्लांट
तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जांच में कंपनी की सुंगुवरचत्रम इकाई में गंदगी, अनुचित भंडारण और खराब मशीनें मिलीं. इसके चलते प्लांट को सील कर दिया गया है. जांच रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि कंपनी ने गैर-फार्मास्यूटिकल ग्रेड का प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल बिना बिल खरीदा था.
कई राज्यों में सप्लाई पर लगा बैन
श्रीसन फार्मा बीते 14 सालों से चेन्नई-बेंगलुरु हाईवे पर छोटे यूनिट से काम कर रही थी. आरोप है कि कंपनी ने बिना गुणवत्ता जांच किए दवाइयां मध्य प्रदेश, राजस्थान, पुदुच्चेरी और ओडिशा तक सप्लाई की. इसके बाद अब तमिलनाडु सरकार ने सभी राज्यों को सिरप की बिक्री रोकने की सलाह दी है. वहीं, केंद्र ने दो अन्य ब्रांड्स – रेलिफ (शेप फार्मा) और रेस्पीफ्रेश (रेडनेक्स फार्मा) पर भी बैन लगा दिया है. इसके साथ ही राजस्थान, तेलंगाना सहित कई राज्यों ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर पिछले दिनों बैन लगा दिया है.
एसआईटी ने मारा चेन्नई में छापा
मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी, जिसमें सात सदस्यीय टीम शामिल है. टीम ने चेन्नई स्थित कंपनी के दफ्तर पर छापा भी मारा. इसके अलावा, डॉ. प्रवीण सोनी को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन पर बच्चों को बार-बार यही सिरप लिखने का आरोप है.