Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: पुण्यतिथि विशेष: सिर्फ कथा सम्राट नहीं, राष्ट्रीय चिंतक और विचारक भी थे प्रेमचंद
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Trending News > पुण्यतिथि विशेष: सिर्फ कथा सम्राट नहीं, राष्ट्रीय चिंतक और विचारक भी थे प्रेमचंद
Trending Newsविचार

पुण्यतिथि विशेष: सिर्फ कथा सम्राट नहीं, राष्ट्रीय चिंतक और विचारक भी थे प्रेमचंद

news desk
Last updated: October 7, 2025 3:08 pm
news desk
Share
प्रेमचंद पुण्यतिथि विशेष
प्रेमचंद पुण्यतिथि विशेष
SHARE

प्रेमचंद को प्रायः उपन्यास सम्राट या कथा सम्राट की पदवी दी जाती है. मेरे ख्याल से प्रेमचंद को सिर्फ उपन्यास या कथा सम्राट कहना, उनके लेखकीय व्यक्तित्व को किंचित सीमित करना होगा. वास्तविकता यह है कि प्रेमचंद केवल कथाकार नहीं थे अपितु वे एक बहुत बड़े राष्ट्रीय चिंतक, संपादक और विचारक थे. प्रेमचंद के कथाकार रूप के सामने प्रायः उनके चिंतक और विचारक रूप को सामने नहीं रखा जाता है जबकि जरूरत इस बात की है कि एक राष्ट्रीय चिंतक के रूप में प्रेमचंद के योगदान को समय-समय पर रेखांकित किया जाए.

प्रेमचंद ने ‘हंस’पत्रिका के जो संपादकीय लिखे हैं, उन संपादकीय लेखों में उनके समय का युग बोध प्रतिफलित होता है. उससे पता चलता है कि प्रेमचंद देश में घटित होने वाली सभी राजनीति घटनाओं और समाज में घटने वाली तमाम तरह की सामाजिक प्रक्रियाओं पर बड़ी पारखी और तीखी नजर रखते थे. वह अपने देश की राजनीतिक,सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक परिस्थितियों को बहुत ठीक से समझते थे. यही कारण है कि अपने वैचारिक लेखन में उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ हमारे समाज में नवजागरण के जो असली मुद्दे हैं, उनको भी केंद्र में रखा.

उनके लेखन के केंद्र में वास्तव में एक आधुनिक भारत के निर्माण की चिंता थी. आधुनिक भारत के निर्माण का प्रश्न भारतीय नवजागरण और हिंदी क्षेत्र में होने वाले नवजागरण दोनों के साथ संबंधित है. प्रेमचंद ने न केवल देश की गरीब और उपेक्षित जनता, किसान, मजदूर, अल्पसंख्यक, दलित, स्त्री का मामला उठाया बल्कि लोकतंत्र के और धर्मनिरपेक्षता के सवाल को भी बहुत गहराई से उठाया. इस प्रकार हम देखें तो प्रेमचंद के जो वैचारिक चिंतन थे, वही उनके कथा – कहानियों और उपन्यासों में प्रतिफलित हुए हैं, चित्रित हुए हैं. प्रेमचंद का संपूर्ण लेखन किस प्रकार एक आधुनिक और लोकतांत्रिक राष्ट्रीय चरित्र का बनकर के उभरता है,इसे देखा और समझा जा सकता है.

  • आखिरी दिनों में अपनी लव स्टोरी का राज बताते हुए क्यों झिझक रहे थे मुंशी प्रेमचंद? पत्नी के जवाब पर रह गए थे हैरान.

हिंदी साहित्य के इतिहास में प्रायः भारतेंदु को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है पर सच्चे अर्थों में देखें तो भारतीय विशेष करके हिंदी साहित्य की आधुनिकता के सच्चे प्रतिनिधि प्रेमचंद ही थे. क्योंकि प्रेमचंद लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता के साथ- साथ भारत की साझी विरासत की वकालत करते थे. वह हिंदी-उर्दू के हिमायती ही नहीं बल्कि दोनों को जोड़ने वाले मजबूत और विश्वसनीय पुल थे. यहां मैं उनकी एक कहानी ‘पंच परमेश्वर’ का जिक्र करना चाहूंगा. यह कहानी भारत की साझी विरासत और धर्मनिरपेक्ष चरित्र के ख्याल से बहुत ही महत्वपूर्ण है. इस कहानी में भारतीय समाज में हिंदू और मुसलमान किस तरह से एक साथ भारतीय बनाकर जी रहे हैं, इसका बड़ा ही मार्मिक और संवेदनशील चित्रण प्रेमचंद ने किया है और यह एक अभूतपूर्व रचना है. यहां जुम्मन शेख की पंचायत अलगू चौधरी करते हैं और अलगू चौधरी का पंचायत में निर्णय जुम्मन शेख करते हैं. यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक मजबूती का प्रतीक है.

इसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर बहुत सारी कहानियां और उपन्यास प्रेमचंद ने लिखे हैं, जिसमें सभी वर्गों के योगदान और सहभागिता को प्रेमचंद ने बड़ी शिद्दत के साथ चित्रित है. प्रेमचंद पूरे भारत को समझते थे. इसलिए उन्होंने जब बाबा साहब अंबेडकर का आंदोलन खड़ा हुआ तो अछूतों के मंदिर प्रवेश और सार्वजनिक स्थानों से उनके जल ग्रहण के मामले को जोरदार ढंग से उठाया. संभवत: 1934 में अपने ‘हंस’ के मुखपृष्ठ पर बाबा साहब की पूरी तस्वीर प्रकाशित कर उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट किया.

प्रेमचंद केवल हिंदी क्षेत्र तक सीमित नहीं थे बल्कि वह पूरे भारतीय स्तर पर चीजों को देखते थे. यही कारण है कि उनकी अखिल भारतीय दृष्टि ने उनको पूरे देश में हिंदी के एक प्रगतिशील लेखक के रूप में स्थापित किया. वह हिंदी का एक संघर्षशील चेहरा बन कर उभरे. सिर्फ भारत में ही नहीं, विदेशों में भी हिंदी की पहचान प्रेमचंद से है और यह एक अच्छी बात है,क्योंकि प्रेमचंद का लेखन मूलत: मानवतावादी था, आधुनिक था,लोकतंत्र और अहिंसा के पक्ष में था.

प्रेमचंद ने एक अद्भुत कार्य किया. वह कार्य यह था कि उन्होंने हिंदी कथा साहित्य में उस वर्ग के लोगों को नायक और नायिका के पद पर स्थापित किया, जिनका समाज, जिनका जीवन अभी तक हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उपेक्षित रहा था. इस प्रकार से देश की गरीब और उपेक्षित जनता के लेखक के रूप में वे सामने आए. यह बिल्कुल अतिशयोक्ति पूर्ण नहीं है कि अमृत राय ने उन्हें ‘कलम का सिपाही’ और मदन गोपाल ने उन्हें ‘कलम का मजदूर’ कहा है. असल में उन्होंने कलम देश के हित में ,गरीब जनता के हित में और सताए हुए लोगों के हित में उठाई थी. वह पीड़ितों के लेखक थे. सामंती मूल्यों के खिलाफ, कट्टर धार्मिक मूल्यों के खिलाफ वे आजीवन संघर्ष करते रहे और उन्होंने जिस प्रकार के भारत की कल्पना की थी, वह भारत बहुत कुछ बाबा साहब अंबेडकर के सपनों का भारत था, जिसमें समानता ,स्वतंत्रता, मुक्ति और भाईचारा का नारा सर्वोपरि था. प्रेमचंद मार्क्स के बताए हुए शोषण मुक्त देश और समाज की भी परिकल्पना करते थे. उनके सपनों का भारत एक ऐसा भारत था, जिसमें लोकतांत्रिक मूल्य सर्वोपरि थे.

प्रेमचंद का लेखन आज इसीलिए प्रासंगिक है, क्योंकि प्रेमचंद ने अपने वर्तमान के साथ-साथ देश और समाज के भविष्य का भी एक ठोस खाका खींचा था, जो आज भी हमें प्रेरित करता है. उनके निर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि ज्ञापित करते हुए मैं उनके इस कथन को दोहराना चाहता हूं कि साहित्य राजनीति के पीछे नहीं बल्कि उसके आगे मशाल लेकर चलने वाली चीज है. हमें साहित्य के द्वारा मानवता की लड़ाई लड़नी होगी. प्रेमचंद के प्रति यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

प्रो. सूरज बहादुर थापा
हिंदी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
ये लेखक के निजी विचार हैं

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: #Democracy, #FreedomMovement, #HansMagazine, #HindiLiterature, #HindustaniCulture, #indianpresshouse, #IndianWriters, #LekhSahitya, #LiteraryIcons, #ModernIndia, #NationalThinker, #PREMCHAND, #PremchandJayanti, #ProgressiveWriters, #Punyatithi, #SocialJustice
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article ओडिशा में BJP नेता पिताबास पांडा की हत्या ओडिशा में BJP नेता पिताबास पांडा की गोली मारकर हत्या, बाइक सवार नकाबपोश हमलावर फरार
Next Article यूपी सरकार ने विपक्षी नेताओं के बरेली दौरे पर लगाई रोक बरेली हिंसा: यूपी सरकार ने विपक्षी नेताओं के बरेली दौरे पर लगाई रोक, AAP नेताओं को लखनऊ में रखा हाउस अरेस्ट, अखिलेश यादव बरेली जा पाएंगे?

फीचर

View More

सालाना 5 अरब कंडोम! जानिए दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम फैक्ट्री ‘Karex’ की पूरी इनसाइड स्टोरी

Why Malaysia Rules the Condom Industry: मलेशिया ही क्यों है कंडोम का 'ग्लोबल किंग'? क्या आप जानते हैं कि दुनिया…

By news desk 4 Min Read

Puri Jagannath Rath Yatra: आस्था का महासंगम, मौसी के घर निकले ‘सारे जगत के नाथ’

पुरी। ओडिशा के पुरी में स्थित प्राचीन सप्तपुरियों में से एक पावन…

6 Min Read

AI की रेस में बदल गया खेल! चीनी मॉडल्स ने बढ़ाई रफ्तार, क्या अमेरिका की बादशाहत पड़ रही है कमजोर?

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ में पिछले कुछ महीनों…

4 Min Read

विचार

View More

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की दस्तक हो चुकी है।…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

रिंकू का ओवर और राइवलरी का बदलता अर्थ: क्या भारत–पाक मुकाबले से गायब हो गई वो अनिश्चितता?

रिंकू का ओवर और राइवलरी का…

February 16, 2026

You Might Also Like

Trending Newsवर्ल्ड

US Visa Rules: अमेरिका जाने का सपना होगा और मुश्किल! ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों- पत्रकारों पर कसा शिकंजा, बदले वीजा के बड़े नियम

नई दिल्ली: अमेरिका में पढ़ाई, पत्रकारिता या सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए जाने की तैयारी कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए…

4 Min Read
Trending Newsवर्ल्ड

‘जेलेंस्की के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा’… यूक्रेन की सड़कों पर हजारों लोग, ‘शर्म करो’ के नारों से गूंजा कीव

नई दिल्ली: रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को अब घरेलू मोर्चे पर भी…

4 Min Read
Trending Newsसियासी

’21 जुलाई से पहले जिसे जाना है, चला जाए…’ ममता बनर्जी का बागियों को खुला अल्टीमेटम, बोलीं- फिर नई रणनीति के साथ उतरेगी TMC

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक के बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने की…

4 Min Read
EntertainmentTrending News

‘क्या सरकार तब जागेगी जब…?’ सोनाक्षी सिन्हा का फूटा गुस्सा, सोनम वांगचुक के समर्थन में की भावुक अपील, समय रैना भी आए साथ

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मुद्दा अब फिल्म जगत में भी जोर पकड़ता नजर आ…

4 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?