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2027 चुनाव से पहले मुस्लिम वोट बैंक पर सियासत तेज…ओवैसी को पहचानने से इनकार कर क्या खुद घिर गए नसीमुद्दीन?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज होती दिख रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करने के लिए नए चेहरों को आगे बढ़ा रही है। इसी कड़ी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।

हाल ही में आयोजित एक ‘पीडीए महापंचायत’ के दौरान सिद्दीकी का एक बयान सुर्खियों में आया, जिसमें उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, “कौन ओवैसी? मैं नहीं जानता।”

बयान पर बढ़ा विवाद

सिद्दीकी के इस बयान को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान AIMIM की राजनीतिक प्रासंगिकता को कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जबकि अन्य इसे विवाद को बढ़ाने वाला मान रहे हैं।

AIMIM का पलटवार

इस बयान पर AIMIM नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता मुफ्ती ओसामा नदवी ने सिद्दीकी पर निशाना साधते हुए उनके राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए और कहा कि इस तरह के बयान तथ्यों से परे हैं। उन्होंने सिद्दीकी के पुराने राजनीतिक संबंधों का भी जिक्र किया।

सपा के सामने चुनौती

‘पीडीए महापंचायत’ के दौरान पार्टी के भीतर भी असहज स्थिति देखने को मिली, जब कुछ कार्यकर्ताओं ने टिकट को लेकर नारेबाजी की। इससे संकेत मिलता है कि सपा को नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

आजम खान की गैरमौजूदगी में नई रणनीति

सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान फिलहाल कानूनी मामलों के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हैं। ऐसे में पार्टी नए नेतृत्व के जरिए मुस्लिम वोटबैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सपा और AIMIM के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। सिद्दीकी का बयान इस रणनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के चुनाव से पहले गठबंधन, रणनीति और बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है। अब देखना होगा कि सपा की यह रणनीति कितना असर डालती है और AIMIM का जवाबी रुख चुनावी समीकरणों को कैसे प्रभावित करता है।

news desk

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