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वंदे मातरम पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने 1937 के CWC प्रस्ताव को बनाया आधार; BJP बोली- वोट बैंक की राजनीति

नई दिल्ली/लखनऊ। वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में वंदे मातरम के मुद्दे पर चर्चा के बाद पार्टी ने साफ किया है कि वह 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा पारित प्रस्ताव के मुताबिक ही राष्ट्रीय गीत को लेकर अपना रुख बनाए रखेगी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम हमेशा से गाया जाता रहा है और इसे लेकर बीजेपी का हमला राजनीतिकरण की कोशिश है।

कांग्रेस ने 1937 के CWC प्रस्ताव का दिया हवाला

जयराम रमेश के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CWC की बैठक में वंदे मातरम को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्ताव का हवाला दिया।

इस प्रस्ताव में जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे प्रमुख नेताओं की भूमिका थी। रमेश ने कहा कि यह प्रस्ताव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था।

कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर ‘फर्जी और दिखावटी राष्ट्रवाद’ का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी 1937 में तय किए गए रुख का पालन करती रहेगी।

वंदे मातरम को लेकर क्या है कांग्रेस का रुख?

कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम के पूरे गीत और उसके आधिकारिक रूप को लेकर 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने एक प्रस्ताव पारित किया था। पार्टी इसी ऐतिहासिक फैसले को अपने वर्तमान रुख का आधार बता रही है।

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि 25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की आखिरी बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किए जाने की घोषणा की थी।

BJP ने कांग्रेस पर लगाया वोट बैंक की राजनीति का आरोप

वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के रुख पर सवाल खड़े किए हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस पर वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

मौर्य ने सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि परिस्थितियां बदलने के बावजूद पार्टी दशकों पुराने फैसले पर कायम है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस को वंदे मातरम की उन पंक्तियों से आपत्ति क्यों है, जिनमें मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का उल्लेख आता है।

यूपी में भी आमने-सामने कांग्रेस और BJP

उत्तर प्रदेश में भी वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में हमेशा वंदे मातरम गाया जाता रहा है।

अजय राय ने दावा किया कि कांग्रेस में 1937 से वंदे मातरम गाने की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बीजेपी से सवाल किया कि उसके कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत को कितनी बार प्रमुखता से स्थान दिया जाता है।

अखिलेश यादव और संजय सिंह ने भी BJP पर साधा निशाना

विवाद के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के नेता खुद वंदे मातरम नहीं गाते और गीत बजने के दौरान केवल सिर हिलाते हैं।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी बीजेपी पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी से जुड़े एक कथित पत्र और आरएसएस के पुराने रुख का हवाला देते हुए बीजेपी से जवाब मांगा।

केरल में BJP करेगी कार्यक्रम

वहीं केरल में बीजेपी ने वंदे मातरम के मुद्दे को लेकर राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया है। पार्टी के मुताबिक 30 संगठनात्मक जिलों में कार्यक्रम होंगे।

बीजेपी का आरोप है कि केरल सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को उचित स्थान नहीं दिया। पार्टी ने इसे लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

150 साल पूरे होने के बाद फिर गरमाया मुद्दा

वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर देशभर में कार्यक्रमों और राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ऐतिहासिक तथ्यों को राजनीतिक नैरेटिव के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि बीजेपी कांग्रेस पर राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रही है।

इस तरह वंदे मातरम अब सिर्फ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच राष्ट्रवाद, इतिहास और राजनीतिक विचारधारा को लेकर नया सियासी टकराव देखने को मिल रहा है।

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news desk

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