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PoK में महंगाई, बिजली संकट और राशन की कमी ने भड़काया जनता का गुस्सा, सेना और सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. बिजली, महंगाई और राशन की कमी के चलते शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विद्रोह की शक्ल ले चुका है. “आज़ाद कश्मीर” का नाम मात्र रह गया है, असल में क्षेत्र पर राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण पूरी तरह पाकिस्तानी हुकूमत के हाथ में है. आवामी एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यह सरकार अपनी ही जनता का खून चूस रही है और उन्हें ‘आज़ाद’ कह कर गुलाम बनाया गया है.

सुरक्षा बलों की कार्रवाई और जनता की मांग

अब तक विरोध के दौरान 10 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक घायल हैं. सुरक्षाबलों ने कई शहरों में सीधी फायरिंग की, आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया. हालात इतने बिगड़े कि सरकार को इंटरनेट और संचार सेवाएं भी बंद करनी पड़ीं. जनता ने सरकार के सामने 38 बिंदुओं की मांग-पत्र पेश किया है, जिसमें बिजली दरों में कमी, स्थानीय संसाधनों पर हक़, राशन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार, सेना का राजनीतिक दखल बंद करना और क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता को बहाल करना शामिल है. यह आंदोलन केवल आर्थिक असंतोष नहीं, बल्कि राजनीतिक उपेक्षा और अधिकार छीनने की पीड़ा का परिणाम है.

भारत की प्रतिक्रिया और मीडिया कवरेज

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की शोषणकारी नीतियों का परिणाम है और PoK की जनता अब जाग चुकी है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि PoK के लोगों के मानवाधिकार सुनिश्चित किए जाएँ. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सड़क पर उतरते दिख रहे हैं, तख्तियों पर लिखा है: “हमें इंसाफ़ चाहिए” और “सेना की सत्ता बंद करो.” PoK की यह आग केवल महंगाई की नहीं, बल्कि लंबे समय की उपेक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए उठ रही आवाज़ है. सवाल यह है कि कब तक सरकार अपनी जनता की आवाज़ को दबाती रहेगी.

news desk

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