नई दिल्ली। कोरोना महामारी के दौर से उबरने के बाद अब दुनिया पर एक और बेहद खतरनाक वायरस का साया मंडराने लगा है। अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला वायरस (Ebola Virus) का प्रकोप बेहद हिंसक रूप ले चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इसे इंटरनेशनल हेल्थ इमरजेंसी (अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित किए जाने के बाद भारत सहित पूरी दुनिया में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
अब तक अफ्रीका में 900 से अधिक संदिग्ध मामले और 223 मौतों की आशंका जताई जा चुकी है। इस बार सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संक्रमण इबोला के सबसे दुर्लभ और जानलेवा ‘बुंडीबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo Strain) की वजह से फैल रहा है, जिसकी कोई वैक्सीन या सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वायरस का वही स्ट्रेन है जो पहली बार साल 2007 में युगांडा में देखा गया था।
इबोला से जंग के बीच कांगो के इटुरी प्रांत से बेहद डराने वाली खबरें आ रही हैं। इटुरी के मोंगबवालु जनरल रेफरल अस्पताल पर विद्रोहियों द्वारा लगातार दो दिन हमले किए गए और इलाज के टेंटों को फूंक दिया गया।
खतरे की घंटी: इस हमले के बाद 18 इबोला मरीज अस्पताल से भाग निकले, जिनमें से एक अधिकारिक रूप से इबोला पॉजिटिव था और वह अब भी आम जनता के बीच घूम रहा है। पूर्वी कांगो के कुछ हिस्सों पर M23 विद्रोही संगठन का कब्जा होने के कारण स्वास्थ्य टीमें प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 24 मई को एक सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है:
हाल ही में युगांडा से बेंगलुरु लौटी एक संदिग्ध महिला को आइसोलेशन में रखा गया था, हालांकि राहत की बात यह रही कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की जांच में उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
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