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ईरान में US से जंग के बीच राष्ट्रपति पेजेशकियान और IRGC सेना में ठनी, समझें पूरा विवाद

मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच ईरान के अंदरखाने से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे महायुद्ध के बीच ईरान के भीतर ही सत्ता के दो सबसे बड़े केंद्र आपस में भिड़ गए हैं। ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य टुकड़ी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और वहां के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) के बीच नीतिगत फैसलों को लेकर भयंकर कलह खुलकर सामने आ गई है।

इस आंतरिक टकराव की मुख्य वजह दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता—‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) बना हुआ है। आइए जानते हैं कि आखिर ईरान के भीतर चल रहे इस ‘शीतयुद्ध’ का असली कारण क्या है।

1. ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर आर-पार: क्यों आमने-सामने हैं सेना और राष्ट्रपति?

ईरान के सत्ता तंत्र में इस वक्त दो बिल्कुल विपरीत विचारधाराएं काम कर रही हैं, जिससे देश दो फाड़ होता नजर आ रहा है:

  • IRGC का अड़ियल रुख (कट्टरपंथी धड़ा): IRGC के टॉप कमांडर्स और कट्टरपंथियों का मानना है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर पूरी तरह नियंत्रण रखना ही ईरान का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है। इसी के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाया जा सकता है। इस धड़े का मानना है कि भले ही ईरान सीधे युद्ध में अमेरिका को न हरा पाए, लेकिन खाड़ी (Gulf) की जंग को लंबा खींचकर वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला सकता है।
  • राष्ट्रपति पेजेशकियान की सोच (पॉलिटिकल लीडरशिप): दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और उनकी सरकार इस तनाव को कूटनीतिक (Diplomatic) तरीके से सुलझाना चाहती है। राष्ट्रपति का मानना है कि अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खोलकर ही ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों और आर्थिक संकट से देश को उबारा जा सकता है।

2. कमांडर अहमद वाहिदी की ‘डेंजरस’ स्ट्रैटेजी

सौफान सेंटर के सीनियर एनलिस्ट केनेथ कैट्जमैन सहित कई अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि IRGC के मुखिया अहमद वाहिदी होर्मुज स्ट्रेट को एक ढाल और हथियार की तरह इस्तेमाल करने पर आमादा हैं।

नोट: अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हमलों के बीच, इसी साल 6 मार्च को अहमद वाहिदी ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की कमान संभाली थी। कमान संभालते ही वाहिदी ने अमेरिका के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है, जो राष्ट्रपति पेजेशकियान की शांति नीति से बिल्कुल उलट है।

3. क्या ईरान में कमजोर पड़ रही है सरकार?

इस अंदरूनी कलह ने ग्लोबल मार्केट और डिफेंस एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है। अगर IRGC ने सरकार की बात न मानकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कच्चे तेल (Crude Oil) के जहाजों को रोका, तो दुनिया भर में तबाही मच सकती है।

अब देखना यह होगा कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतौल्लाह खामेनेई इस विवाद में किसका साथ देते हैं—बातचीत का रास्ता चुनने वाले राष्ट्रपति पेजेशकियान का या फिर अमेरिका को तबाह करने की कसम खा चुके IRGC कमांडर अहमद वाहिदी का।

news desk

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