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BJP को झटका या गठबंधन को मजबूती? पवन सिंह का चुनाव न लड़ने का फैसला और ज्योति सिंह का किशोर से जुड़ाव बिहार की राजनीति में बढ़ा रहा सस्पेंस

भोजपुरी सुपरस्टार और भाजपा समर्थक पवन सिंह ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का बड़ा फैसला किया है, लेकिन उन्होंने खुद को BJP का “सच्चा सिपाही” बताते हुए पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की है. इस बीच, बिहार की सियासत में कई नए सियासी समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, जिनमें पवन सिंह की उपेंद्र कुशवाहा से हालिया मुलाकात और उनकी पत्नी ज्योति सिंह का किशोर से मिलना एक बड़ा कारण मना जा रहा है.

पवन सिंह ने कहा है: मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, लेकिन भाजपा के लिए हमेशा खड़ा रहूंगा. मेरी निष्ठा और सेवा का रिश्ता पार्टी से अटूट है. पार्टी भी इस मामले में संतुलित रुख अपनाए हुए है और अपने स्टार प्रचारकों की भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रही है. पवन सिंह का चुनाव न लड़ने का फैसला राजनीति के विशेषज्ञों के लिए बड़ा सवाल पैदा कर रहा है.

आपको बता दे की पवन सिंह ने हाल ही में दिल्ली में उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की थी.  इस बैठक का उद्देश्य दोनों के बीच राजनीतिक मतभेदों को खत्म कर NDA गठबंधन में सामंजस्य बढ़ाना था. बिहार की राजनीति में यह कदम गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है. इससे आगामी विधानसभा चुनाव में सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

वही दूसरी तरफ पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने जनसुराज संस्थापक प्रशांत किशोर से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि यह मुलाकात चुनावी टिकट मांगने के लिए नहीं, बल्कि न्याय और सुरक्षा के लिए थी. हालांकि, राजनीतिक अटकलें लग रही हैं कि ज्योति चुनाव लड़ सकती हैं. इससे बिहार की राजनीति में नया सियासी ड्रामा बनने की संभावना है. क्योकि अभी हाल ही में ज्योति ने मीडिया के सामने बोला था की मै पवन जी को टक्कर देते हुए चुनाव लडूंगी. वो जहा से लड़ने वही से लडूंगी.

राजनीतिक हलचल और संभावित प्रभाव

बीजेपी के लिए चुनौती: पवन सिंह का चुनाव न लड़ना पार्टी के लिए वोट बैंक की कमजोरी ला सकता है, वहीं ज्योति सिंह के आरोप विपक्ष को भाजपा के खिलाफ मजबूत करने का मौका दे सकते हैं.

गठबंधन राजनीति: उपेंद्र कुशवाहा से पवन सिंह की मुलाकात से भाजपा के भीतर गठबंधन समीकरण मजबूत हुए, जिससे बीजेपी को भोजपुरिया इलाकों में राजनीतिक दबदबा बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

विपक्ष की रणनीति: ज्योति सिंह का प्रशांत किशोर से जुड़ना विपक्ष को नए सियासी अवसर प्रदान करता है, जो आगामी चुनावों में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

पवन सिंह का चुनाव से दूरी बनाना, उपेंद्र कुशवाहा से उनकी मुलाकात और ज्योति सिंह का प्रशांत किशोर से जुड़ाव बिहार की सियासत में नए समीकरण और सस्पेंस की परतें खोल रहा है. आने वाले महीनों में इन राजनीतिक हलचलों का बिहार विधानसभा चुनाव 2025 पर गहरा असर पड़ सकता है.

news desk

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