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पाकिस्तान में पेट्रोल का ‘अंतिम समय’: मंत्री बोले- हमारे पास 1 दिन का भी स्टॉक नहीं, भारत की तैयारी देख दुनिया हैरान

इस्लामाबाद/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका संघर्ष) में छिड़ी जंग ने पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली मलिक ने एक चौंकाने वाले खुलासे में स्वीकार किया है कि देश के पास एक दिन का भी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) मौजूद नहीं है। उन्होंने इस संकट की तुलना भारत की मजबूत स्थिति से करते हुए अपनी लाचारी व्यक्त की है।

‘हम भारत जैसे नहीं’ – पाक मंत्री का बड़ा कबूलनामा

पाकिस्तानी चैनल ‘समा टीवी’ को दिए इंटरव्यू में अली मलिक ने कहा कि जहां भारत के पास 60 से 70 दिनों का विशाल तेल भंडार है, जिसे एक हस्ताक्षर के जरिए आपातकाल में जारी किया जा सकता है, वहीं पाकिस्तान के पास ऐसा कुछ भी नहीं है।

पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति:

  • रणनीतिक भंडार (SPR): शून्य (0 दिन)
  • व्यावसायिक कच्चा तेल: केवल 5 से 7 दिन का स्टॉक।
  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) के पास उत्पाद: अधिकतम 20-21 दिन।

क्यों खाली हैं पाकिस्तान के भंडार?

मंत्री अली मलिक ने बताया कि सरकार ने इस संकट पर रिसर्च करवाई थी और स्वतंत्र सलाहकारों ने रणनीतिक भंडार बनाने के लिए विस्तृत रिपोर्ट भी दी थी। लेकिन, भारी लागत (करोड़ों डॉलर) के कारण इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के पास भंडार बनाने के लिए निवेश करने की क्षमता नहीं है।

ईरान युद्ध और $170 प्रति बैरल का डर

मलिक ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का जिक्र करते हुए कहा कि दुबई में कच्चे तेल की कीमतें ऐतिहासिक स्तरों को छू रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि स्थिति और बिगड़ी, तो कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जो पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी होगा।

  • सब्सिडी का बोझ: शहबाज शरीफ सरकार जनता को राहत देने के लिए सब्सिडी देने की कोशिश कर रही है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार की कमी इसमें बड़ी बाधा है।
  • सप्लाई चेन पर नजर: ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते सप्लाई लाइन बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे पाकिस्तान में पेट्रोल की किल्लत और बढ़ सकती है।

भारत की ‘ऊर्जा शक्ति’ से सहमा पड़ोसी

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर) में भारी निवेश किया है। इसके अलावा, भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध और अब ईरान संकट के दौरान भी चतुराई से अपनी सप्लाई को सुरक्षित रखा है। यही कारण है कि पाकिस्तानी नेतृत्व अब खुले मंच पर भारत के ‘साइन मात्र से तेल जारी करने’ की क्षमता का लोहा मान रहा है।

news desk

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