29 जनवरी की शाम दिल्ली की गलियों में झलकेगा
अगर आपको लगता है कि गणतंत्र दिवस की परेड ही सब कुछ थी, तो थोड़ा रुकिए! असली ‘पिक्चर’ अभी बाकी है। 29 जनवरी की शाम, जब सूरज रायसीना हिल्स के पीछे छिप रहा होगा, तब दिल्ली का विजय चौक एक ऐसी जादुई दुनिया में बदल जाएगा जहाँ संगीत की थाप पर कदमताल होगी और आसमान रोशनी से बातें करेगा।
विजय चौक एक बार फिर भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के बैंड की जादुई धुनों और सैन्य अनुशासन का गवाह बनेगा। ये केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सदियों पुरानी उस सैन्य परंपरा का जीवंत रूप है, जो युद्ध के मैदान से शांति की ओर लौटने का प्रतीक है।
क्यों खास है ‘बीटिंग रिट्रीट 2026’?
ये सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय सेना का ‘रॉकस्टार मोमेंट’ है। यहाँ इस बार क्या-क्या खास होने वाला है, देखिए:
आसमान में कोई पटाखा नहीं, बल्कि स्वदेशी ड्रोन्स का झुंड होगा ‘मेक इन इंडिया’ की कहानी लिखेगा।
जब सेना के पाइप्स और ड्रम बैंड ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर अपनी धुन छेड़ेंगे, तो यकीन मानिए रोगटे खड़े होना पक्का है!
राष्ट्रपति भवन से लेकर नॉर्थ-साउथ ब्लॉक तक, पूरी इमारतें तिरंगे के रंगों में ऐसी चमकेंगी कि आपका कैमरा भी थक जाएगा पर फोटो खत्म नहीं होंगी।
परंपरा और गरिमा का संगम
‘बीटिंग रिट्रीट’ का इतिहास 17वीं शताब्दी से जुड़ा है। पुराने समय में जब युद्ध सूर्यास्त के समय रुकता था, तो ‘रिट्रीट’ की धुन बजाकर सैनिकों को वापस बुलाया जाता था। भारत ने इस परंपरा को 1950 में अपनाया था।
समारोह के अंत में जब सूर्यास्त के साथ राष्ट्रीय ध्वज उतारा जाता है और पूरा रायसीना हिल्स रोशनी से नहा उठता है, तो वो दृश्य हर भारतीय को गौरवान्वित कर देता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति की मौजूदगी और उनके आगमन-प्रस्थान के दौरान दी जाने वाली सलामी इस शाम की गरिमा को और बढ़ा देती है।
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