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“ना अभी, ना कभी…” अयातुल्लाह अली खामेनेई की चेतावनी पर आज भी कायम ईरान, अमेरिका-इजरायल को खुली चुनौती

अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान को निशाना बना रहे हैं, लेकिन 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। दावा किया जा रहा है कि ईरान अब दोनों देशों पर भारी पड़ रहा है और उसकी मिसाइलें लगातार हमले कर रही हैं।

अमेरिका की ‘एग्जिट स्ट्रैटेजी’?

इस स्थिति के बीच यह संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका किसी भी तरह इस जंग से बाहर निकलना चाहता है। डोनाल्ड ट्रंप लगातार समझौते का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं, ताकि किसी तरह इस संघर्ष को खत्म किया जा सके। हालांकि, यह आसान नहीं दिख रहा, क्योंकि ईरान आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

इजरायल पर बढ़ सकता है दबाव

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिका इस जंग से पीछे हटता है, तो इजरायल की स्थिति क्या होगी। आम धारणा है कि इजरायल की ताकत काफी हद तक अमेरिका के समर्थन पर निर्भर करती है। ऐसे में अगर अमेरिका पीछे हटता है, तो इजरायल पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर ईरानी मिसाइल हमलों के चलते।

ट्रंप के बदलते बयान

ट्रंप के बयानों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। अलग-अलग समय पर उनके अलग रुख सामने आ रहे हैं, लेकिन संकेत साफ हैं कि वह इस जंग से बाहर निकलना चाहते हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और जल्द ही यह संघर्ष समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को भारी नुकसान हुआ है।

ईरान का सख्त इनकार

हालांकि, ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी सेना के ‘खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय’ के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जुल्फिकारी ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं हो रही है।

“क्या ट्रंप खुद से ही बात कर रहे हैं?”

ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में जुल्फिकारी ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा,
“क्या आपके अंदरूनी झगड़े इस हद तक पहुंच गए हैं कि आप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं?”

उन्होंने आगे कहा,“हमारा पहला और आखिरी शब्द पहले दिन से ही एक जैसा रहा है और आगे भी रहेगा। हमारे जैसा कोई व्यक्ति आपके जैसे व्यक्ति के साथ कभी समझौता नहीं करेगा—न अभी, न कभी।”

‘रणनीतिक विफलता’ का आरोप

जुल्फिकारी ने अमेरिका की रणनीति को विफल बताते हुए कहा कि जो देश खुद को वैश्विक महाशक्ति कहता है, अगर उसके पास क्षमता होती तो वह अब तक इस संकट से बाहर निकल चुका होता। उन्होंने कहा, “अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए, आपके खोखले वादों का दौर अब खत्म हो चुका है।”

ईरानी सेना का कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता उनकी सैन्य ताकत से ही सुनिश्चित होगी और वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।कुल मिलाकर, ईरान ने साफ संकेत दे दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। अब यह देखना अहम होगा कि आगे क्या कूटनीतिक समाधान निकलता है या फिर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता जाएगा।

SYED MOHAMMAD ABBAS

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