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FD या रियल एस्टेट नहीं, इस एसेट क्लास ने 20 साल में पैसे को किया 17 गुना; फंड्स इंडिया की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

news desk
Last updated: May 21, 2026 2:35 pm
news desk
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पारंपरिक तौर पर भारतीय परिवारों में आज भी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रियल एस्टेट को निवेश का सबसे सुरक्षित और पसंदीदा जरिया माना जाता है। लेकिन क्या वाकई इनमें पैसा लगाना आपको लंबी अवधि में अमीर बना रहा है? ‘फंड्स इंडिया’ की हालिया वेल्थ रिपोर्ट के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे पारंपरिक सोच को पूरी तरह से बदलने वाले हैं।

Contents
अलग-अलग एसेट क्लास का प्रदर्शन: 20 साल का लेखा-जोखाभारतीय शेयर बाजार का 35 साल का ‘क्रैश-प्रूफ’ इतिहासबाजार के ‘बाहुबली’: मिड-कैप और स्मॉल-कैप का जलवानिवेश का अचूक मंत्र: ‘सब्र का फल मीठा होता है’

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप 10, 15 या 20 साल जैसी लंबी अवधि के लिए निवेश का प्लान कर रहे हैं, तो शेयर बाजार (भारतीय और अमेरिकी दोनों) ने डेट फंड्स और रियल एस्टेट जैसी दूसरी सभी संपत्तियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है। दिलचस्प बात यह है कि बीते दो दशकों में सोने (Gold) ने भी निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है, लेकिन वह भी अमेरिकी बाजार की रफ्तार से पिछड़ गया।

अलग-अलग एसेट क्लास का प्रदर्शन: 20 साल का लेखा-जोखा

लॉन्ग टर्म में किस एसेट क्लास ने निवेशकों की किस्मत बदली, इसे समझने के लिए पिछले दो दशकों (20 साल) के सालाना रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन के इस तुलनात्मक चार्ट को देखिए..

एसेट क्लास (Asset Class)20 साल का सालाना रिटर्न (%)20 साल में कितने गुना हुआ पैसा?
अमेरिकी इक्विटी (US Stocks)15.2%लगभग 17.01 गुना
सोना (Gold)14.6%लगभग 15 गुना से ज्यादा
भारतीय इक्विटी (Nifty 50)11.4%लगभग 8.7 गुना
रियल एस्टेट (Real Estate)7.9%लगभग 4.5 गुना
डेट इंस्ट्रूमेंट्स / FD7.5% – 7.6%लगभग 4.3 गुना

अमेरिकी बाजार ने 10 साल की अवधि में 19.4% और 15 साल की अवधि में 19.8% का शानदार सालाना रिटर्न देकर निवेशकों की संपत्ति को क्रमशः 5.9 गुना और 15 गुना तक बढ़ाया है।

भारतीय शेयर बाजार का 35 साल का ‘क्रैश-प्रूफ’ इतिहास

अगर आपको लगता है कि भारतीय शेयर बाजार बहुत ज्यादा अस्थिर है, तो रिपोर्ट का यह आंकड़ा आपकी चिंता दूर कर देगा। जुलाई 1990 से लेकर अब तक (पिछले 35 वर्षों में), भारतीय बाजार ने कई बड़े घोटाले, वैश्विक मंदी, आर्थिक संकट और सुधारों के दौर देखे हैं।

इन तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद, निफ्टी 50 (Nifty 50) ने 13.2% की कंपाउंडेड एनुअल Growth Rate (CAGR) दर्ज की है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि जिसने 35 साल पहले बाजार में 1 लाख रुपये लगाकर छोड़ दिए थे, उसकी रकम आज बढ़कर लगभग 85 लाख रुपये (85 गुना) हो चुकी है।

बाजार के ‘बाहुबली’: मिड-कैप और स्मॉल-कैप का जलवा

जब बात भारतीय शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टर्स की आती है, तो पिछले 20 सालों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट ने लार्ज-कैप (बड़ी कंपनियों) के मुकाबले कहीं ज्यादा आक्रामक रिटर्न दिया है:

  • मिड-कैप (Nifty Midcap 150 TRI): इसने 20 वर्षों में 14.6% का सालाना रिटर्न दिया, जिससे निवेशकों की दौलत 15 गुना से भी अधिक बढ़ गई।
  • स्मॉल-कैप (Nifty Smallcap 250 TRI): छोटे शेयरों वाले इस इंडेक्स ने 12.7% का सालाना रिटर्न निकाला और पैसे को करीब 11 गुना कर दिया।
  • लार्ज-कैप (Nifty 100 TRI): देश की सबसे बड़ी 100 कंपनियों वाले इस सेगमेंट ने 11.8% का रिटर्न दिया और 20 साल में संपत्ति को 9 गुना बढ़ाया।

निवेश का अचूक मंत्र: ‘सब्र का फल मीठा होता है’

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि इक्विटी में शॉर्ट-टर्म (6 महीने से 3 साल) का निवेश हमेशा जोखिम भरा और अस्थिर हो सकता है, जहां आपको नुकसान (Negative Return) भी झेलना पड़ सकता है।

लेकिन, जैसे-जैसे आप अपने निवेश का समय बढ़ाते हैं, नुकसान की संभावना घटकर शून्य के करीब पहुंच जाती है। ऐतिहासिक डेटा गवाह है कि जिन निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 7 वर्ष या उससे अधिक समय तक धैर्य बनाए रखा, उन्हें बाजार ने कभी निराश नहीं किया और लगातार 7 से 10 फीसदी से कहीं ज्यादा का दमदार रिटर्न कमा कर दिया।

यदि आप केवल सुरक्षित निवेश के नाम पर एफडी या पारंपरिक स्कीम्स में पैसा पार्क कर रहे हैं, तो आप महंगाई को तो हरा सकते हैं, लेकिन बड़ी दौलत (Wealth Creation) नहीं बना सकते। समझदारी इसी में है कि वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो में अमेरिकी और भारतीय इक्विटी के साथ सोने का एक सही संतुलन (Asset Allocation) बनाएं।

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TAGGED: Funds India Wealth Report, Long Term Investment India, Nifty 50 CAGR, US Equity Returns, बेस्ट इन्वेस्टमेंट प्लान, मिडकैप स्मॉलकैप रिटर्न, शेयर बाजार बनाम एफडी
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