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हर मच्छर को नहीं भाता हर इंसान! शरीर की गंध से चुनता है अपना ‘पसंदीदा’ शिकार, रिसर्च में खुला बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों का राज

नई दिल्ली: अगर आपको लगता है कि मच्छर आपको दूसरों के मुकाबले ज्यादा काटते हैं, तो इसके पीछे सिर्फ संयोग नहीं हो सकता। एक नई स्टडी में सामने आया है कि मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियां इंसानों को एक ही तरह से नहीं चुनतीं। वे शरीर से निकलने वाली प्राकृतिक गंध और अलग-अलग रासायनिक संकेतों को पहचानकर तय कर सकती हैं कि किस इंसान की ओर उन्हें आकर्षित होना है। खास बात यह है कि हर प्रजाति की पसंद अलग पाई गई है।

119 लोगों पर हुई स्टडी, तीन खतरनाक प्रजातियों को किया गया शामिल

फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 119 लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया। रिसर्च में तीन ऐसी मच्छर प्रजातियों का परीक्षण किया गया, जो इंसानों में गंभीर बीमारियां फैलाने के लिए जानी जाती हैं।

इनमें एडीज एजिप्टी, एडीज एल्बोपिक्टस और क्यूलेक्स क्विनक्वेफैसिएटस शामिल थीं। ये प्रजातियां डेंगू, जीका, पीला बुखार और वेस्ट नाइल जैसी बीमारियों के प्रसार में भूमिका निभाती हैं।

एक जैसी नहीं थी तीनों मच्छरों की पसंद

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि तीनों प्रजातियों ने एक जैसे लोगों को पसंद नहीं किया। हर मच्छर प्रजाति ने इंसानी शरीर की गंध में मौजूद अलग-अलग रासायनिक संकेतों के आधार पर अपनी पसंद तय की।

इंसानी शरीर से एक हजार से ज्यादा तरह के वाष्पशील कार्बनिक यौगिक निकल सकते हैं। इनमें से कई रसायनों के बारे में वैज्ञानिकों को अभी पूरी जानकारी नहीं है। यही रसायन शरीर की प्राकृतिक गंध का हिस्सा बनते हैं और मच्छरों के लिए इंसान तक पहुंचने के संकेत का काम कर सकते हैं।

एडीज एजिप्टी को ऐसे लोग ज्यादा आकर्षित करते हैं

एडीज एजिप्टी ने उन लोगों की ओर अधिक आकर्षण दिखाया, जिनकी त्वचा में कुछ खास वाष्पशील रसायनों की मात्रा कम थी और जो शरीर पर अतिरिक्त खुशबू का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे।

इस प्रजाति ने पुरुषों की ओर हल्का अधिक आकर्षण भी दिखाया। एडीज एजिप्टी आम तौर पर दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है और कई गंभीर वायरल बीमारियों के प्रसार से जुड़ा है।

एशियन टाइगर मच्छर की पसंद भी अलग

एडीज एल्बोपिक्टस को एशियन टाइगर मच्छर के नाम से भी जाना जाता है। अध्ययन में पाया गया कि यह प्रजाति त्वचा से स्वाभाविक रूप से निकलने वाले कुछ खास कीटोन और पौधों जैसी गंध वाले रसायनों की ओर अधिक आकर्षित हुई।

यह प्रजाति भी मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहती है। यानी एक ही इंसान की गंध अलग-अलग मच्छरों के लिए अलग तरह का संकेत दे सकती है।

क्यूलेक्स मच्छर त्वचा के सूक्ष्मजीवों को पहचानता है

क्यूलेक्स क्विनक्वेफैसिएटस की पसंद बाकी दोनों प्रजातियों से अलग पाई गई। यह मच्छर आमतौर पर रात में अधिक सक्रिय रहता है और इंसानी त्वचा पर मौजूद सूक्ष्मजीवों के समुदाय से मिलने वाले संकेतों पर अधिक निर्भर करता है।

हमारी त्वचा पर हमेशा बड़ी संख्या में बैक्टीरिया, फंगस और दूसरे सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। ये सूक्ष्मजीव त्वचा की प्राकृतिक गंध को प्रभावित करते हैं। रिसर्च में संकेत मिला कि कुछ बैक्टीरियल समूह मच्छरों को इंसान की ओर आकर्षित कर सकते हैं, जबकि कुछ दूसरे समूह उन्हें दूर रखने वाले संकेत पैदा कर सकते हैं।

शरीर की गंध और मच्छरों की पसंद का क्या है कनेक्शन?

शोधकर्ताओं के मुताबिक इंसानी शरीर की गंध सिर्फ एक सामान्य खुशबू नहीं है, बल्कि इसमें कई तरह के रासायनिक संकेत शामिल होते हैं। मच्छर अपनी प्रजाति के अनुसार इन संकेतों को पहचान सकते हैं और इसी आधार पर अपने संभावित मेजबान की ओर बढ़ सकते हैं।

इसका मतलब यह भी है कि किसी व्यक्ति को एक खास प्रजाति का मच्छर अधिक काट सकता है, जबकि दूसरी प्रजाति उसके प्रति उतनी आकर्षित न हो। हालांकि, केवल शरीर की गंध के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को निश्चित रूप से ज्यादा मच्छर काटेंगे।

रिसर्च से भविष्य में बीमारी रोकने में मिल सकती है मदद

यह अध्ययन वैज्ञानिक जर्नल आईसाइंस में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च टीम का नेतृत्व फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के न्यूरोजेनेटिसिस्ट मैथ्यू डीगेनारो ने किया, जबकि शोध की अगुवाई पीएचडी छात्रा कायली मारेरो ने की।

शोधकर्ताओं का मानना है कि मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियों की इंसानी गंध के प्रति पसंद को समझने से भविष्य में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए नए उपाय विकसित करने में मदद मिल सकती है।

vineet verma

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