नई दिल्ली में आज बुधवार को लोकसभा का माहौल एक बार फिर पूरी तरह गरम रहा। हंगामा इतना बढ़ गया कि बात सदन से निकलकर सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चेंबर तक पहुंच गई। पूरा विवाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की उन टिप्पणियों से शुरू हुआ, जो उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नेहरू–गांधी परिवार को लेकर किताबों का हवाला देते हुए कीं।
बजट सत्र के दौरान जैसे ही निशिकांत दुबे ने ‘एडविना एंड नेहरू’, इंदिरा गांधी और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी किताबों का जिक्र करते हुए तीखे आरोप लगाए, कांग्रेस सांसद भड़क गए। विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी, कुछ सदस्यों ने कागज तक उछाल दिए। हालात इतने बिगड़े कि स्पीकर ओम बिरला को कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी और आखिरकार सदन को शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सदन की कार्यवाही ठप होने के बाद कांग्रेस सांसद सीधे स्पीकर के चेंबर पहुंचे और निशिकांत दुबे के बयानों की शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस का कहना था कि जब राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरावणे की अप्रकाशित किताब से उद्धरण पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई, तो फिर दुबे को किताबें दिखाकर इस तरह के आरोप लगाने की छूट कैसे मिल गई? उनका आरोप था कि यह साफ तौर पर दोहरा मापदंड है।
स्पीकर के चेंबर में माहौल और भी गरम हो गया। एक तरफ कांग्रेस सांसद थे, दूसरी ओर बीजेपी के नेता और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत संसदीय कार्य मंत्री मौजूद थे। दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस हुई। बीजेपी ने कांग्रेस पर सदन की मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने दुबे की भाषा को असंसदीय और अपमानजनक बताया और उनके शब्द रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
निशिकांत दुबे द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर विपक्ष खासा नाराज़ दिखा। कुल मिलाकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। राहुल गांधी की किताब वाला विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि यह नया बखेड़ा खड़ा हो गया। स्पीकर ने सभी से संयम बरतने की अपील जरूर की है, लेकिन बजट सत्र में सियासी टकराव थमता नजर नहीं आ रहा।