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कुख्यात ‘ला सांते’ जेल में सजा काटेंगे फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी. लीबिया फंडिंग स्कैंडल में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला!

पेरिस: भ्रष्टाचार का आरोप और पूर्व राष्ट्रपति को भी मिली जेल. ये बात सुनने में अटपटी लग सकती है. लेकिन अगर कानून फ्रांस का हो तो ये संभव भी होता है. फ्रांस के इतिहास में ये बड़ी घटना तब दर्ज हो गई जब पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी को पेरिस की कुख्यात (La Santé) जेल भेजने का फैसला अमल में आने ही वाला है.

70 वर्षीय सरकोजी पर 2007 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए लीबिया के तत्कालीन तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी से अवैध धन लेने का आरोप है. पेरिस की अपील अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा सुनाई, जिसमें से 3 साल निलंबित हैं. अदालत ने “अपराध की असाधारण गंभीरता” का हवाला देते हुए अपील की सुनवाई का इंतजार किए बिना सजा लागू करने का ऐतिहासिक आदेश दिया.

हादसे का केंद्र, लीबिया फंडिंग स्कैंडल

सरकोजी पर आरोप है कि उन्होंने गद्दाफी शासन से करीब 5 करोड़ यूरो की अवैध फंडिंग ली, जिसके बदले में लीबिया को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहाल करने का वादा किया. यह मामला 2012 से जांच के घेरे में था, लेकिन दिसंबर 2021 में पहली सजा के बाद अपील में भी वे फंस गए. सरकोजी ने सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है, “मुझे न्याय का भरोसा है” लेकिन अदालत ने फैसला सुनाया कि उनके अपराध ने लोक व्यवस्था में गंभीर अव्यवस्था पैदा की. सोमवार शाम को सरकोजी ने मीडिया को बताया, “मैं सिर ऊंचा रखकर जाऊंगा. ला सांते के दरवाजों के सामने भी ” उनकी पत्नी कार्ला ब्रूनी सार्कोज़ी और परिवार ने जेल के बाहर समर्थकों से प्रदर्शन की अपील की है.

क्या है ला सांते जेल जहां जाने से डरते है कुख्यात अपराधी?

1867 में बनी ला सांते जेल फ्रांस की सबसे पुरानी और कुख्यात जेलों में शुमार है. 19वीं सदी से यहां कई ऐतिहासिक कैदी रखे गए हैं, जिनमें यहूदी अधिकारी कैप्टन अल्फ्रेड ड्रेफस शामिल हैं. जिन्हें यहूदी होने के कारण देशद्रोह के झूठे आरोप में सजा दी गई थी. वेनेज़ुएला का आतंकवादी “कार्लोस द जैकल” भी यहां सड़ता रहा, जिसने फ्रांस में कई हमले कराए. हाल के वर्षों में जेल का पुनर्निर्माण हुआ है, लेकिन पूर्व कैदियों के मुताबिक, यहां की कठोरता वही है.

पूर्व कारोबारी पियरे बॉटन, जो 2020-2022 तक इसी जेल के “संवेदनशील कैदी” सेक्शन में रहे, उन्होंन ने बताया, “जो व्यक्ति यहां आता है, वह राष्ट्रपति नहीं रहता. सरकोजी को भी वही सहना पड़ेगा जो बाकी सबने सहा अकेलापन, सख्त नियम और मानसिक दबाव” जेल अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से सरकोजी को एकांत कारावास में रखा जा सकता है, या फिर “वीआईपी सेक्शन” में, जहां कमजोर कैदियों को रखा जाता है. यहां उन्हें सुबह 7 बजे उठना होगा, सीमित घंटे बाहर निकलने की छूट मिलेगी, और निगरानी कैमरों की नजर में रहेंगे.

अपील का रास्ता,दो महीने का इंतजार

फैसले के तहत, सरकोजी जेल पहुंचने के बाद ही अपील अदालत में रिहाई का अनुरोध दाखिल कर सकेंगे. न्यायाधीशों को इस पर विचार करने के लिए दो महीने मिलेंगे. फ्रांस के न्याय मंत्री ने सुरक्षा जांच का आश्वासन दिया है. सोशल मीडिया पर #SarkozyPrison ट्रेंड कर रहा है, जहां समर्थक न्यायिक साजिश का आरोप लगा रहे हैं, जबकि आलोचक इसे लोकतंत्र की जीत बता रहे हैं. यह फैसला फ्रांस की राजनीति को हिला देगा. सरकोजी, जो 2007-2012 तक राष्ट्रपति रहे, यूरोपीय संघ के प्रमुख नेता थे. उनके समर्थक इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश. पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा, “कानून सबके लिए बराबर है” सरकोजी ने ला ट्रिब्यून डिमांचे को बताया, “मुझे जेल से डर नहीं, मैं आखिरी सांस तक लड़ूंगा” उन्होंने कहा जेल में वो नई किताब लिखने की योजना बना रहे हैं

news desk

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