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UPI पर नया टैक्स ट्विस्ट! Google Pay और PhonePe यूजर्स के लिए बदलने वाला है पेमेंट सिस्टम, क्या है सरकार का नया प्लान

स्कैन, पे और डन, चाय की टपरी से लेकर लग्जरी मॉल्स तक, हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका UPI अब एक बड़े मेकओवर के लिए तैयार है। अगर आप भी सुबह से शाम तक बिना कैश के सिर्फ QR Code के भरोसे चलते हैं, तो यह लेटेस्ट अपडेट सीधे आपके लिए है।

खबर के मुताबिक, केंद्र सरकार बड़े कॉर्पोरेट्स और बिजनेस हाउसेज पर 2,000 रुपए से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन्स पर मर्चेंट फीस यानी MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का फुलप्रूफ प्लान बना रही है। अगले दो हफ्तों के अंदर इस पॉलिसी चेंज पर फाइनल मुहर लग सकती है।

क्या आम जनता की जेब कटेगी?

जैसे ही यह खबर फ्लैश हुई, सोशल मीडिया से लेकर चाय की चौपालों तक एक ही पैनिक बटन दब गया, क्या अब Google Pay, PhonePe या Paytm यूज करने के लिए भी एक्स्ट्रा पैसे देने होंगे? सरकार के टॉप ऑफिशियल्स ने बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर कर दिया है कि आम यूजर्स के लिए UPI हमेशा की तरह 100% फ्री रहेगा। इस पूरे गेम प्लान का मकसद आम जनता के बजट को छेड़ना बिल्कुल नहीं है। यह मर्चेंट फीस सिर्फ और सिर्फ बड़े ब्रांड्स, मॉल्स और कॉर्पोरेट व्यापारियों की जेब से कटेगी।

इस नए प्रपोजल के 4 सबसे बड़े हाइलाइट्स

2,000 का फिल्टर: यह नया नियम सिर्फ 2,000 रुपए से ज्यादा के हाई-वैल्यू पेमेंट्स पर ही ट्रिगर होगा। यानी आपकी रोजमर्रा की ग्रोसरी और पॉकेट मनी वाले पेमेंट्स पर कोई आंच नहीं आएगी।

0.5% से भी कम का कट: बड़े बिजनेसमैन पर जो MDR लगाने की तैयारी है, उसे 0.5% से भी कम के स्लैब में रखा जाएगा, ताकि बिजनेस पर भी अचानक भारी लोड न आए।

टारगेट पर सिर्फ बड़े मर्चेंट्स: यह फीस सिर्फ बड़े सुपरमार्केट्स, नामी ब्रांड्स और बड़े ऑनलाइन/ऑफलाइन चेन स्टोर्स को देनी होगी। आपके लोकल किराना स्टोर या गली-मोहल्ले के छोटे दुकानदार इससे पूरी तरह सेफ हैं।

14 दिनों में फाइनल कॉल: इस ड्राफ्ट पर सरकार के हायर लेवल्स पर सीरियस डिस्कशन चल रहा है। अगले दो हफ्तों में फाइनल पिक्चर सामने आ जाएगी।

आखिर सरकार को क्यों उठाना पड़ रहा है यह कदम?

UPI आज भारत के कोने-कोने में पहुंच चुका है, लेकिन इस विशाल नेटवर्क को चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए एक बहुत बड़े तकनीकी बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। करोड़ों ट्रांजैक्शंस को सेफ, सिक्योर और सुपरफास्ट रखने के लिए बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स को पानी की तरह पैसा बहाना पड़ रहा है।

सस्टेनेबिलिटी का पंगा: अब तक चल रहे ‘जीरो एमडीआर’ (यानी कोई चार्ज नहीं) मॉडल की वजह से बैंकों के लिए इस पूरे इकोसिस्टम को लंबे समय तक बिना किसी कमाई के संभालना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

पार्लियामेंट्री कमेटी का रेड फ्लैग: फाइनेंस मिनिस्ट्री की स्टैंडिंग कमेटी ने पहले ही वॉर्निंग दे दी थी कि अगर UPI का कोई सॉलिड रेवेन्यू मॉडल नहीं बनाया गया, तो फ्यूचर में इसके अपग्रेडेशन, साइबर सिक्योरिटी और नए यूजर्स को जोड़ने का काम ठप पड़ सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय

एक्सपर्ट्स का कहना है की यह कदम यूपीआई इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत और भविष्य के लिए अधिक सुरक्षित बनाने की एक कोशिश है। अच्छी बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल पेमेंट का सफर पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ्त और आसान बना रहेगा।

news desk

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