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नेतन्याहू बनाम पूर्व सेना प्रमुख: इजराइल में सत्ता परिवर्तन की जंग तेज, गादी आइजनकोट ने बनाई नई पार्टी ‘यशर’, चुनावी मैदान में उतरे पूर्व सेना प्रमुख

तेल अवीव (इजराइल)। इजराइल की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने के लिए उनके सबसे बड़े और मजबूत प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सेना प्रमुख (IDF चीफ ऑफ स्टाफ) गादी आइजनकोट ने सीधे चुनावी मैदान में उतरने का एलान कर दिया है। आइजनकोट ने बेनी गैंट्ज़ की पार्टी छोड़कर अपनी नई सेंट्रिस्ट (मध्यमार्गी) पार्टी ‘यशर’ (Yashar) का गठन किया है और ‘इजराइल को जीतना चाहिए’ के नारे के साथ अपना चुनावी अभियान शुरू कर दिया है।

चुनावी बिगुल फूंकते हुए आइजनकोट ने नेतन्याहू सरकार पर देश में अराजकता और विभाजन पैदा करने का सीधा आरोप लगाया है।

7 अक्टूबर के जख्मों पर घेरा: “आगामी अक्टूबर में इस भयानक सरकार का अंत होगा”

आइजनकोट ने अपने भाषण में सीधे 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले का जिक्र करते हुए नेतन्याहू सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:

“आगामी अक्टूबर में उस भयानक अक्टूबर (7 अक्टूबर हमले) की सरकार का अंत हो जाएगा। हम इजराइल के इतिहास में एक नया और कहीं बेहतर अध्याय मिलकर लिखेंगे। यह चुनाव इजराइल की सुरक्षा, एकता और उसकी आत्मा के लिए निर्णायक है।”

पूर्व जनरल ने वादा किया है कि वे सत्ता में आते ही 7 अक्टूबर के नरसंहार (जिसमें 1,200 लोग मारे गए थे) की जांच के लिए एक स्वतंत्र राज्य आयोग (State Commission) का गठन करेंगे, ताकि भविष्य के लिए सबक सीखा जा सके।

हारेदी समुदाय की सैन्य छूट पर सीधा वार: “सबको करनी होगी देश की सेवा”

बिना नाम लिए नेतन्याहू पर निशाना साधते हुए आइजनकोट ने अति-रूढ़िवादी यहूदियों (हारेदी समुदाय) को सैन्य सेवा से छूट देने वाले विवादित प्रस्तावों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे देश के लिए जान देने वाले सैनिकों के मुंह पर तमाचा बताया।

आइजनकोट के 4 बड़े संकल्प:

  1. अनिवार्य सैन्य सेवा: हारेदी (Ultra-Orthodox) और अरब समुदायों को भी अनिवार्य रूप से सैन्य या राष्ट्रीय सेवा में शामिल किया जाएगा।
  2. रिजर्व सैनिकों को राहत: देश के रिजर्व सैनिकों पर से बोझ कम करने के लिए रिजर्व सेवा को साल में अधिकतम 50 दिनों तक सीमित किया जाएगा।
  3. पुनर्वास योजना: युद्ध से प्रभावित उत्तर और दक्षिण इजराइल के क्षेत्रों का तेजी से पुनर्वास किया जाएगा।
  4. गठबंधन पर दो टूक: नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड की ‘टुगेदर पार्टी’ के दबाव के बीच आइजनकोट ने साफ कर दिया कि वह किसी ऐसे गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे जिसका नेतृत्व कोई और कर रहा हो।

नेतन्याहू का पलटवार: “अगर आइजनकोट की सुनते तो गाजा पर आज भी हमास होता”

दिसंबर 2022 से लगातार पीएम की कुर्सी पर बैठे बेंजामिन नेतन्याहू भी इस चुनौती के बाद आक्रामक हो गए हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि आइजनकोट में दूरदृष्टि और रणनीति का अभाव है। नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर उन्होंने युद्ध कैबिनेट में रहते हुए आइजनकोट की उन रणनीतियों को माना होता, जो कुछ सैन्य अभियानों का विरोध कर रही थीं, तो आज पूरे गाजा क्षेत्र पर हमास का नियंत्रण होता।

कभी नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट का हिस्सा रहे गादी आइजनकोट अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इजराइल का यह चुनावी दंगल अब रणनीतिक विफलता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा की नई बहस में तब्दील हो चुका है।

news desk

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