काठमांडू। भ्रष्टाचार मुक्त नेपाल का सपना दिखाकर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे प्रधानमंत्री बालेन शाह (बलेंद्र शाह) की सरकार गठन के पहले ही महीने में गंभीर अस्तित्व के संकट में घिर गई है। नेपाल के राजनीतिक हलकों में ‘बदलाव’ की जो उम्मीद जगी थी, वह मंत्रियों के इस्तीफों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच दम तोड़ती नजर आ रही है।
ताजा झटका गृह मंत्री सुदन गुरुंग के इस्तीफे से लगा है, जिन्होंने कैबिनेट में शामिल होने के महज तीन हफ्ते के भीतर ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ और संदिग्ध शेयर हेरफेर के आरोपों के बाद पद छोड़ दिया।
एक समय ‘क्रांति’ के सहारे राजनीति में प्रवेश करने वाले सुदन गुरुंग पर आरोप है कि उन्होंने जेल जा चुके विवादित कारोबारी दीपक भट्ट की कंपनियों में शेयर खरीदे। ‘नेपाली कांग्रेस’ ने इसे ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का मामला बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की।
अपने इस्तीफे में गुरुंग ने बार-बार ‘नैतिकता’ और Gen-Z (युवा पीढ़ी) की सुशासन की मांग का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वे निष्पक्ष जांच का सामना करना चाहते हैं और नहीं चाहते कि गृह मंत्री की कुर्सी पर बैठकर वे जांच को प्रभावित करें (Conflict of Interest)।
भारी जनमत के साथ प्रधानमंत्री बने बालेन शाह के लिए यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। सरकार की शुरुआत में ही मंत्रियों का इस तरह विवादित होना जनता के भरोसे को तोड़ सकता है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में एक नया नैरेटिव जोर पकड़ रहा है। उनके ‘सीआईए’ (CIA) एजेंट होने के दावे भू-राजनीतिक विश्लेषणों का हिस्सा बन गए हैं। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक या प्रमाणित पुष्टि नहीं है, लेकिन यह सरकार की साख के लिए एक बड़ी नैतिक चुनौती जरूर बन गया है।
कई राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि नेपाल की नई सरकार अब भी स्थिर नहीं है। श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह की अनुशासनहीनता के बाद बर्खास्तगी और अब गृह मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप इन दोनों घटनाओं ने सरकार की छवि को गहरा नुकसान पहुँचाया है। यदि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस स्थिति को जल्द नहीं संभाला, तो उनकी सरकार भी उसी ढर्रे पर चलेगी जैसे पहले की सरकारें चलती थीं, और ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकेगी।
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